भाटापारा, जब समाज को अपराध मुक्त बनाने का संकल्प लेने वाले नेता ही विवादों के घेरे में आ जाएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है यह एक बेहद गंभीर और विचारणीय टिप्पणी है।विधायक और पूर्व विधायक ने एक दूसरे पर लगाया अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप , एक दिन पूर्व की बात है जब विधायक इंद्र साव ग्रामीण थाना में अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर धरने में बैठे हुए थे तब विधायक इंद्र साव ने पुलिस प्रशासन को पूर्व विधायक शिव रतन शर्मा की उंगली पर नाचने वाली कठपुतली बतलाए थे। उसके बाद राजनीति माहौल गरमा गया, वही पूर्व विधायक भाजपा नेता शिवरतन शर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए मीडिया से कहा कि विधायक इंद्र साव पर असामाजिक तत्वों, नशीली दवाओं के तस्करों, अवैध शराब माफियाओं और मारपीट करने वाले अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण देने के गंभीर है। जब भाटापारा क्षेत्र में समाज को अपराध मुक्त बनाने और कानून व्यवस्था सुधारने का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि , नेता खुद विवादों या कानूनी घेरे में आ जाते हैं, तो आम जनता का सिस्टम और प्रशासनिक व्यवस्था पर से भरोसा डगमगाने लगता है।इस तरह की स्थितियां भाटापारा के लोकतंत्र और स्थानीय प्रशासन के सामने कई बड़े सवाल खड़े करती हैं नैतिकता का संकट जो नेतृत्व समाज को दिशा देने और अपराध मिटाने का संकल्प लेता है, उसकी खुद की छवि निष्पक्ष और बेदाग होनी चाहिए।कानून व्यवस्था पर असर जब रक्षक या नीति निर्माता ही विवादों में घिरते हैं, तो स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर भी निष्पक्ष काम करने का दबाव बढ़ जाता है।जनता में अविश्वास नागरिकों में यह संदेश जा रहा है कि कानून का पालन सिर्फ आम जनता के लिए है, रसूखदारों के लिए नहीं।भाटापारा के संदर्भ में राजनीतिक और सामाजिक शुचिता हमेशा से चर्चा का विषय रही है। एक सजग नागरिक के तौर पर व्यवस्था पर सवाल उठाना लोकतंत्र को मजबूत करने का काम करता है वहीं दोनों पार्टी के युवा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे पर दोष प्रत्यारोप लगा रहे और सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं।








