रायपुर / डोंगरगढ़: डोंगरगढ़ की प्रसिद्ध देवी मां बम्लेश्वरी के नाम और इतिहास को लेकर विवाद गहरा गया है। गोंड समाज ने हालिया घटनाक्रमों और बयानों को अपनी सदियों पुरानी परंपरा के विपरीत बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया है। समाज के प्रतिनिधियों ने इस मामले में राज्यपाल के नाम एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपकर संबंधित पक्ष से तुरंत खंडन, स्पष्टीकरण और लिखित माफी की मांग की है।
‘बम्लेश्वरी’ नहीं, ‘दाई बमलाई’ है मूल नाम:
गोंड समाजगोंड समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि डोंगरगढ़ की देवी का इतिहास उनकी जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनकी मूल पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस सिद्ध पीठ की देवी को प्राचीन काल से ‘दाई बमलाई’ के नाम से पूजा जाता था। समय बीतने के साथ बाद में इसका नाम बदलकर ‘बम्लेश्वरी’ प्रचलित कर दिया गया, जो कि मूल इतिहास के साथ छेड़छाड़ है।
डॉ. मोतीरावण कंगाली की पुस्तक को बनाया आधार
समाज ने अपने इस दावे को मजबूत करने के लिए प्रख्यात जनजातीय इतिहासकार और साहित्यकार डॉ. मोतीरावण कंगाली की प्रामाणिक पुस्तक ‘डोंगरगढ़ की बमलाई दाई बमलेश्वरी’ का विशेष रूप से उल्लेख किया है। समाज का तर्क है कि यह केवल किसी नाम का सतही विवाद नहीं है, बल्कि यह उनकी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहर को अक्षुण्ण बनाए रखने की लड़ाई है।








