दल्लीराजहरा/चिखलाकसा :-छत्तीसगढ़ के प्रमुख पारंपरिक पर्व कमरछठ / हलषष्ठी का पर्व इस वर्ष बुधवार को पूरे श्रद्धा भाव से मनाया गया। संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए माताओं ने निर्जला व्रत रखा। माताओं ने सगरी बनाकर शिव-पार्वती की पूजा की। घर के आंगन व गली-मोहल्ले में दो सगरी (प्रतीकात्मक तालाब) बनाकर मिट्टी के शिवलिंग, गौरी-गणेश, बैल और खिलौनों से सजावट की गई। सगरी में भैंस के दूध, दही, घी, बेलपत्र, काशी के फूल, लाई, महुआ, तिल और अरहर सहित छह प्रकार के अन्न का भोग चढ़ाकर पूजा की गई। नगर पंचायत चिखलाकसा की अध्यक्ष श्रीमती कुंती देवांगन ने बताया कि माता देवकी ने अपने पुत्र बलराम की रक्षा के लिए भादो कृष्ण पक्ष षष्ठी को यह व्रत रखा था, तभी से यह व्रत किया जाता है। अध्यक्ष कुंती देवांगन ने नगर पंचायत चिखलाकसा व दल्लीराजहरा की सभी माताओं-बहनों को कमरछठ पर्व की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। इसी प्रकार दल्लीराजहरा, चिखलाकसा, डोंडी क्षेत्र में भी महिलाओं ने सामूहिक रूप से कथा सुनी और शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया।








