झीरम घाटी हमले की निष्पक्ष जांच की मांग:कांग्रेस बोली- हथियारों तक पहुंची जांच, अब उन्हें चलाने वाले हाथों तक पहुंचे

बलौदाबाजार में जिला कांग्रेस कमेटी ने झीरम घाटी नक्सली हमले पर NIA के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, कांग्रेस ने मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, हमले के प्रत्यक्षदर्शी सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि यह जांच का विषय है कि घटना के मुख्य आरोपियों को कोर्ट के सामने क्यों नहीं लाया गया।

सुरेंद्र शर्मा ने पूछा कि कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी? घटना वाले दिन नेताओं की सुरक्षा में तैनात जवानों को किसके कहने पर हटाया गया और उन्हें कहां भेजा गया? इन सभी सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

‘हथियार चलाने वालों तक जांच पहुंचना बाकी’

सुरेंद्र शर्मा ने कहा, “अदालत ने हथियारों को सजा दी है, लेकिन उन हथियारों को चलाने वाले हाथों तक जांच अभी नहीं पहुंची है।” उन्होंने कहा कि झीरम घाटी हत्याकांड की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए व्यापक और निष्पक्ष जांच जरूरी है।

वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया संचार विभाग के पूर्व प्रभारी शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि झीरम घाटी की घटना कोई सामान्य नक्सली हमला नहीं थी। यह एक सुनियोजित सुपारी किलिंग जैसी लगती है।

उन्होंने कहा कि हमलावरों ने महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल और दिनेश पटेल समेत कई नेताओं के नाम लेकर उन्हें निशाना बनाया था। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि इन नेताओं को खास तौर पर निशाना बनाने के पीछे कौन था और किसने सुपारी दी थी।

जेल में बंद नक्सलियों से पूछताछ की मांग

त्रिवेदी ने कहा कि कई राज्यों की जेलों में ऐसे नक्सली बंद हैं, जिन्होंने झीरम घाटी हमले में शामिल होने की बात स्वीकार की है। इसके बावजूद उनसे ठीक से पूछताछ और बयान दर्ज क्यों नहीं किए गए, यह बड़ा सवाल है।

उन्होंने कहा कि झीरम की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए हमले में शामिल नक्सली नेताओं और अन्य संदिग्धों से गहराई से पूछताछ होनी चाहिए।

कांग्रेस बोली- NIA का फैसला सम्मान योग्य, लेकिन न्याय अधूरा

जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमित्रा धृतलहरे ने कहा कि कांग्रेस NIA के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन इसे पूर्ण न्याय नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि न्याय तभी पूरा होगा, जब झीरम घाटी नरसंहार के पीछे के मुख्य साजिशकर्ता और पूरी साजिश जनता के सामने आएगी।

भाजपा सरकार पर जांच प्रभावित करने का आरोप

धृतलहरे ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में झीरम घाटी मामले की जांच को प्रभावित करने और भटकाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल सरकार के समय मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया गया था, लेकिन भाजपा सरकार ने जांच को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की ओर से न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्थगन (स्टे) लिया जाना भी कई सवाल खड़े करता है।

NIA की जांच पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल

धृतलहरे ने कहा कि कांग्रेस ने समय-समय पर NIA की जांच और उसकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। घटना में शामिल बताए जाने वाले बड़े नक्सली नेताओं से पूछताछ और उनके बयानों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है।

पूरी साजिश और साजिशकर्ताओं को सामने लाने की मांग

धृतलहरे ने कहा कि जब तक झीरम घाटी नरसंहार के पीछे की पूरी साजिश और उसके सूत्रधार सामने नहीं आते, तब तक इसे पूर्ण न्याय नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि झीरम घाटी नरसंहार की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जाए, घटना के पीछे के राजनीतिक और अन्य षड्यंत्रकारियों की पहचान की जाए और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दी जाए।

 

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