बलौदाबाजार ,से रिसदा, सुहेला होते हुए हथबंद तक जाने वाली 48 किमी लंबी सड़क लंबे समय से गड्ढों में गुम है। सड़क बनाने 48. 70 करोड़ रुपए का टेंडर जारी हो चुका है। पांच महीने पहले ठेका भी दिया जा चुका है। इसके बावजूद जर्जर सड़क से लोगों की परेशानी बरकरार है। सड़क की बदहाली को लेकर राजनीतिक घमासान भी खूब हुआ। विपक्षी नेताओं ने कई बार सड़क की हालत को लेकर सत्ता पक्ष और सरकार को घेरा। जल्द निर्माण शुरू कराने की मांग उठाई। अब, जबकि नई सड़क का ठेका हो चुका है, लोगों की नजर निर्माण शुरू होने और उसकी गुणवत्ता पर है।
सड़क बनी राजनीतिक मुद्दा, विपक्ष ने कई बार घेरा: बलौदाबाजार-सुहेला-हथ बंद मार्ग की जर्जर हालत लंबे समय से स्थानीय राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा रही है। विपक्षी नेताओं ने सड़क के गड्ढों, भारी वाहनों की आवाजाही, मरम्मत में देरी को लेकर सत्ता पक्ष पर सवाल उठाए। कई मौकों पर सड़क की स्थिति को लेकर बयानबाजी और प्रदर्शन भी हुए। सोशल मीडिया पर सड़क की बदहाली के वीडियो वायरल होने के बाद मामला और चर्चा में आया। विपक्ष का आरोप रहा कि जनता की रोजमर्रा की परेशानी के बावजूद सड़क निर्माण में लगातार देरी की जा रही है। इस मार्ग पर रोजाना करीब 400 से 500 बल्कर और भारी वाहन आवाजाही करते हैं। फ्लाईऐश से भरे कई बल्करों में 50 से 60 टन तक माल लदा रहता है।
जबकि 12 चक्का वाहन के लिए 25 टन, 14 चक्का वाहन के लिए 30 टन, 16 चक्का वाहन के लिए 35 टन, 18 चक्का वाहन के लिए 40 टन तक भार निर्धारित है। ऐसे में ओवरलोड वाहनों की लगातार आवाजाही सड़क की हालत बिगाड़ रही है। न्यू विस्टा सीमेंट, श्री सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, थर्मल पावर प्लांट, राइस मिलों, एग्रो इंडस्ट्रीज के बड़े वाहनों का भी इस मार्ग पर दबाव है। पीडब्ल्यूडी के एसडीओ एमएल नायक ने बताया कि ढाबों-पेट्रोल पंपों को नोटिस दिया है। ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने कहा है। सड़क निर्माण की अवधि दिसंबर 2026 तक है। बरसात खत्म होते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। हर हाल में दिसंबर तक इसे पूरा कराया जाएगा। सड़क की बदहाली का बड़ा कारण ढाबे, पेट्रोल पंप, वॉशिंग सेंटर भी हैं। नियमानुसार इन संस्थानों की ड्रेनेज व्यवस्था ऐसी हो कि परिसर का पानी सड़क पर न आए। ढाबे और पेट्रोल पंप सड़क के लेवल से ऊंचे हैं। इनके सामने जल निकासी की समस्या के कारण सड़क ज्यादा खराब हुई है।








