जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में विवाह बाधा को दूर करने की जो धार्मिक मान्यता प्रचलित है, उसका सनातन संस्कृति और लोक परंपरा में एक बहुत ही गहरा और तार्किक महत्व है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है, यानी वे जीवन के किसी भी शुभ कार्य में आने वाली तमाम अड़चनों, दोषों और विघ्नों को जड़ से समाप्त करने वाले देवता हैं। विवाह को मनुष्य जीवन का सबसे प्रमुख और मांगलिक संस्कार माना जाता है, इसलिए ज्योतिषीय गणनाओं या ग्रहों के बुरे प्रभाव के कारण जब किसी युवक या युवती के विवाह में बार-बार रुकावटें आती हैं, रिश्ता तय होकर टूट जाता है, या उम्र बीतने के बाद भी सही जीवनसाथी नहीं मिल पाता, तो भक्त भगवान गणेश की शरण में आते हैं।मोती डूंगरी मंदिर में विवाह बाधा निवारण का सबसे मुख्य केंद्र यहां आयोजित होने वाला वार्षिक सिंजारा मेहंदी उत्सव है, जो करीब दो सौ वर्षों से भी अधिक समय से निरंतर मनाया जा रहा है। इस विशेष उत्सव के दौरान देश की सबसे प्रसिद्ध मेहंदी नगरी, पाली जिले के सोजत से कई हजार किलो (लगभग ३५०० किलो) उच्च गुणवत्ता वाली शुद्ध मेहंदी मंगवाई जाती है। इस मेहंदी को सबसे पहले भगवान गणेश जी महाराज के चरणों में अर्पित किया जाता है। पूरे गर्भगृह में स्थापित सिद्ध प्रतिमा के समक्ष वेदमंत्रों और तांत्रिक विधि-विधान से इस मेहंदी को अभिमंत्रित और जागृत किया जाता है, जिससे यह मात्र एक सौंदर्य सामग्री न रहकर एक महाप्रसाद और दिव्य औषधि का रूप ले लेती है।इस अभिमंत्रित मेहंदी को लेकर यह अटूट जन-विश्वास और लोक मान्यता है कि जो भी अविवाहित लड़का या लड़की इस चमत्कारी प्रसादी मेहंदी को अपने हाथों पर श्रद्धापूर्वक रचाता है, उसके कुंडली के सभी दोष जैसे मांगलिक दोष, राहु-केतु की बुरी नजर या बृहस्पति ग्रह की कमजोरी, जो विवाह में देरी का कारण बनते हैं, वे सब बप्पा के आशीर्वाद से एक झटके में शांत हो जाते हैं। भक्तों का ऐसा दृढ़ विश्वास है कि इस मेहंदी को लगाने के बाद आगामी एक वर्ष के भीतर या अगली गणेश चतुर्थी आने से पहले उस व्यक्ति के विवाह के उत्तम संयोग बन जाते हैं और उनका रिश्ता पक्का हो जाता है।इसी दिव्य चमत्कार और भरोसे के कारण हर साल सिंजारा की रात को देश-विदेश से आए लाखों कुंवारे युवाओं की मीलों लंबी कतारें मंदिर के बाहर देखने को मिलती हैं, जो बप्पा की इस चमत्कारी मेहंदी की एक पुड़िया पाने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। इस लोक आस्था का सबसे खूबसूरत और जीवंत प्रमाण यह है कि जिन युवक-युवतियों की मन्नत बप्पा की इस मेहंदी से पूरी हो जाती है, वे अगले वर्ष विवाह बंधन में बंधने के बाद अपनी शादी की सबसे पहली कुमकुम पत्रिका (निमंत्रण पत्र) लेकर सपरिवार मोती डूंगरी आते हैं। वे भगवान गजानन के चरणों में अपना पहला कार्ड अर्पित कर उन्हें धन्यवाद देते हैं और अपने सुखी दांपत्य जीवन की शुरुआत के लिए शीश नवाते हैं, जो यह साबित करता है कि बप्पा के दरबार में सच्चे दिल से मांगी गई हर अर्जी और विवाह की हर बाधा निश्चित रूप से दूर होती है।
मोती डूंगरी के ‘विघ्नहर्ता’ कैसे चुटकियों में दूर करते हैं विवाह की हर बाधा, जानिए इसके पीछे की गहरी लोक आस्था








