कलेक्ट्रेट पहुंची बेजुबान गौ-वंश की मौन फरियाद – “साहब, दूध बंद किया तो क्या बेसहारा छोड़ दोगे?

संदीप यादव मुंगेली। शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट में एक ऐसा नजारा दिखा जिसने सबका ध्यान खींच लिया। कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर गार्डन में एक आवारा गाय घुस आई और काफी देर तक हरी घास चरती रही। इसके बाद वह सीधे मुख्य द्वार के सामने आकर खड़ी हो गई।

देखने वालों को लगा जैसे वह कोई शिकायत लेकर साहब के पास आई हो।

पहली नजर में यह मामूली घटना लग सकती है, लेकिन यही घटना जिले में बेलगाम हो चुकी आवारा पशुओं की समस्या की असली तस्वीर दिखा गई।

सड़क से खेत तक संकट

जिले में घुमंतू पशुओं के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं। शहर की सड़कों पर अचानक सामने आ जाने वाले मवेशियों से आए दिन हादसे हो रहे हैं। कई बार पशु वाहन की चपेट में आकर मर जाते हैं तो कई बार बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।

गांवों में किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। रात में झुंड में खेतों में घुसकर मवेशी खड़ी फसल को रौंद देते हैं। किसान रात-रात भर रखवाली करने को मजबूर हैं। शिकायतें कई बार हो चुकी हैं, पर समाधान नहीं निकला।

दूध तक ही रिश्ता?

इस घटना का दूसरा पहलू बेहद संवेदनशील है। जब तक गाय दूध देती है, तब तक घर में उसकी जगह है। दूध बंद होते ही कई पशुपालक उसे सड़क पर छोड़ देते हैं। यही पशु बाद में आवारा बनकर भटकते हैं।

सवाल उठता है कि क्या गाय का उपयोग सिर्फ दूध और दिवाली की पूजा तक ही सीमित है?

दर्जन भर गौधाम, जमीन पर कहां हैं?

जानकारी के मुताबिक मुंगेली जिले में घुमंतू पशुओं के लिए लगभग 12 गौधाम स्वीकृत हैं। लेकिन हकीकत यह है कि 1-2 को छोड़कर ज्यादातर गौधाम या तो बंद पड़े हैं या वहां पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

यदि गौधाम सही तरीके से चलें, पशुओं की देखरेख हो और पशुपालकों की जवाबदेही तय हो, तो यह समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।

जिम्मेदारी किसकी?

इस समस्या के लिए सिर्फ प्रशासन जिम्मेदार नहीं है। पशुपालकों को भी समझना होगा कि पालतू पशु को सड़क पर छोड़ना अपराध है। प्रशासन को भी चाहिए कि गौधामों को कागजों से निकालकर जमीन पर चलाए और खुले में पशु छोड़ने वालों पर कार्रवाई करे।

कलेक्ट्रेट पहुंची उस एक गाय ने कोई आवेदन नहीं दिया, लेकिन वह प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ गई है – कि क्या उसकी इस मौन फरियाद को सुना जाएगा?

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