डोंगरगढ़ में नकली शराब गिरोह पर शिकंजा तीन गिरफ्तार

राजनांदगांव: जिले के डोंगरगढ़ क्षेत्र में नकली शराब तैयार करने और उसे असली ब्रांड की तरह बाजार में खपाने के लिए कथित तौर पर नकली लेबल, होलोग्राम और स्टिकर बनाने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान एक प्रिंटिंग दुकान से शराब की बोतलों पर लगाए जाने वाले बड़ी संख्या में नकली लेबल और होलोग्राम मिलने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नकली शराब की सप्लाई के संबंध में जानकारी जुटा रही है।पुलिस के मुताबिक नकली शराब के कारोबार से जुड़े मामले की जांच के दौरान कुछ अहम जानकारियां मिली थीं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को पता चला कि शराब की पैकेजिंग को असली दिखाने के लिए नकली होलोग्राम, लेबल और स्टिकर तैयार किए जा रहे थे। इसके बाद संबंधित ठिकानों पर कार्रवाई की गई। जांच के दौरान पुलिस की टीम एक प्रिंटिंग दुकान तक पहुंची। यहां तलाशी लेने पर कथित तौर पर विभिन्न शराब ब्रांड से मिलते-जुलते लेबल, होलोग्राम और अन्य प्रिंटिंग सामग्री बरामद की गई। पुलिस को आशंका है कि इनका इस्तेमाल नकली शराब को ब्रांडेड शराब की बोतलों में पैक कर बाजार में बेचने के लिए किया जाना था।मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि वे कब से इस काम में शामिल थे और उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। इसके अलावा नकली लेबल और होलोग्राम तैयार कराने वाले लोगों तथा इन्हें आगे सप्लाई करने वालों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि नकली शराब कहां तैयार की जाती थी और तैयार बोतलों को किन इलाकों में बेचा जाता था। आशंका है कि नकली पैकेजिंग का इस्तेमाल कर ग्राहकों को शराब के असली होने का भरोसा दिलाया जाता था। ऐसे में जांच का दायरा शराब बनाने से लेकर पैकेजिंग और बिक्री तक पूरे नेटवर्क पर केंद्रित किया गया है।नकली शराब का कारोबार केवल राजस्व नुकसान का मामला नहीं है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और जान के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। अवैध रूप से तैयार शराब में इस्तेमाल पदार्थों और उनकी मात्रा पर किसी तरह का गुणवत्ता नियंत्रण नहीं होता। इसी वजह से नकली या जहरीली शराब के सेवन से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और मौत तक होने का खतरा रहता है। पुलिस अब जब्त सामग्री की जांच कर रही है। प्रिंटिंग दुकान से मिले लेबल और होलोग्राम किसके कहने पर तैयार किए गए और इनके लिए कितना भुगतान किया गया, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। डिजिटल लेनदेन, मोबाइल संपर्क और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

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