बलौदाबाजार। जिले के प्राचीन गांव डमरू की पुरातात्विक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने शनिवार को डमरू पहुंचकर प्राचीन मंदिरों, पुरातात्विक अवशेषों और पूर्व में किए गए उत्खनन स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने धरोहरों के संरक्षण के लिए आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
कलेक्टर ने गांव के प्राचीन शिव मंदिर और महामाया मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन शिलाओं और पुरातत्व विभाग द्वारा सुरक्षित रखे गए अवशेषों का अवलोकन किया। उन्होंने ऐतिहासिक महत्व की इन धरोहरों को व्यवस्थित रूप से संरक्षित करने के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
दो टीलों में दोबारा उत्खनन की तैयारी
डमरू में वर्ष 2013 से 2015 के बीच छत्तीसगढ़ संस्कृति एवं पुरातत्व संचालनालय द्वारा दो टीलों में उत्खनन कराया गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अनुमति से डॉ. शिवकांत बाजपेयी के निर्देशन में हुए इस उत्खनन में महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष मिलने की जानकारी सामने आई थी।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने दोनों उत्खनन स्थलों का जायजा लिया और दोबारा उत्खनन शुरू कराने के लिए विभागीय स्तर पर प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। माना जा रहा है कि नए सिरे से होने वाली खुदाई से डमरू के प्राचीन इतिहास और यहां विकसित धार्मिक परंपराओं से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।
मिले थे भगवान बुद्ध के चरणचिह्न
डमरू में हुए पूर्व उत्खनन के दौरान भगवान बुद्ध के चरणचिह्न मिलने की जानकारी सामने आई थी। इन पुरातात्विक साक्ष्यों को मध्य भारत के बौद्ध इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया। उपलब्ध अवशेषों के आधार पर डमरू के पहली से पांचवीं सदी के बीच हीनयान बौद्ध परंपरा के एक महत्वपूर्ण केंद्र रहे होने की संभावना जताई गई है।
शिवनाथ नदी के तट पर स्थित डमरू बलौदाबाजार से करीब 14 किलोमीटर दूर है। प्राचीन मंदिरों और पुरातात्विक अवशेषों के कारण यह क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। दोबारा उत्खनन होने पर यहां की पुरातात्विक पहचान और बौद्ध परंपरा से जुड़े कई नए तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
ग्रामीणों को सड़क की सौगात
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से भी बातचीत की। ग्रामीणों ने शिव मंदिर से मुख्य मुक्तिधाम तक पक्की सड़क नहीं होने की समस्या बताई। इस पर कलेक्टर ने मौके पर ही सड़क निर्माण की स्वीकृति देते हुए अधिकारियों को जल्द प्राक्कलन तैयार करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा उन्होंने मुख्य मुक्तिधाम में निर्माणाधीन शेड का निरीक्षण कर निर्माण कार्य समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। प्रशासन की इस पहल से जहां डमरू की पुरातात्विक विरासत के संरक्षण और अध्ययन को गति मिलने की उम्मीद है, वहीं ग्रामीणों को सड़क जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध होगी।








