कर्मचारी नही संभाल पा रहे व्यवस्था, समस्या बढ़ी
बिलासपुर:- संभाग के सबसे बड़े अस्पताल सिम्स में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, हालत यह है कि सोमवार को एमआरडी रिकार्ड के अनुसार 2 हजार 587 मरीजों से ओपीडी पंजीयन कराया है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। यही कारण है कि कई बार मरीजों को समय पर जांच और रिपोर्ट के लिए भटकना पड़ रहा है, हालांकि मरीजों के बढ़ने का एक कारण पिछले सालों की अपेक्षा सिम्स में सुविधाओं का बढ़ना है।
वीकेंड के बाद सिम्स अस्पताल में मरीजों का तांता लगा रहता है। मेडिसीन, स्कीन, आर्थोपेडिक, ईएनटी, मानसिक और नेत्र विभाग जैसे विभागों में मरीजों की भारी भरकम भीड़ रहती है, हालत यह है कि सुबह 9 बजे से शुरू हुई मरीजों लाइन 2 बजे भी कम नहीं हो रही है। इस दौरान 2600 मरीजों के इलाज के लिए सिम्स अस्पताल अब छोटा पड़ रहा है भले ही अस्पताल प्रबंधन अपनी सुविधाओं को जुटाने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ देने का प्रयास कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद सिम्स में वार्ड और ओपीडी में जगह की कमी साफ तौर पर दिखाई देती है। दरअसल सिम्स अस्पताल की स्थापना 300 ओपीडी और 60 आईपीडी से शुरू होकर 1000 ओपीडी-120 आईपीडी की क्षमता पर चल रही है, जबकि वर्तमान में मरीजों की तादात तिगुनी हो चुकी है। ऐसे में व्यवस्था संभालना मुश्किल हो रहा है, साथ ही डाक्टर और स्टाफ पर बोझ बढ़ चुका है।
जांच और रिपोर्ट में देरी
खास बात यह है कि ओपीडी और आईपीडी में डाक्टरों से इलाज मिल रहा है, लेकिन जांच और रिपोर्ट के लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है, दरअसल पूरे अस्पताल में 3 पाली में स्टाफ की ड्यूटी लगाई जा रही है, लेकिन इसके बाद भी सोनोग्राफी, एक्सरे, एमआरआई, पैथोलॉजी विभाग में मरीजों को जांच व रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। दरअसल स्टाफ की कमी और संसाधनों की सीमित क्षमताओं के चलते रिपोर्ट और जांच में देरी हो रही है।
पैर रखने की जगह नहीं
सिम्स में मेडिसीन और स्कीन विभाग में आम दिनों में पैर रखने की जगह नहीं होती है। मौसम में बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। दिन और रात के तापमान में आ रही भारी गिरावट की वजह से मौसम लोगों पर कहर बरपा रहा है। घर-घर लोग बीमार पड़े हैं। सर्दी, जुखाम, बुखार के मरीज बढ़ चुके है। तापमान में असामान्य बढ़त और कमी के कारण लोगों को संक्रमण की समस्या ज्यादा हो रही है। यही हाल स्कीन विभाग का है, जहां मरीजों की रोजाना संख्या 300 के पार पहुंच रही है।
मरीजों का विश्वास जमा
डाक्टरों का कहना है कि सिम्स में आने वाले ज्यादातर मरीज गरीब तबके से आते हैं. लेकिन सुविधाएं बढ़ने के साथ ही हर वर्ग के लोगों का सिम्स में इलाज हो रहा है। यही कारण है कि मरीजों की तादात दिन ब दिन बढ़ रही है। हालत यह है कि पेंड्रा, मुंगेली, जांजगीर, कोरबा, कटघोरा, बिल्हा. मस्तुरी जैसे जगहों से मरीज पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि सुपर स्पेशलिटी इलाज को छोड़ किसी भी मरीज को रेफर नहीं किया जाता है. कुछ समय तक आर्थोपेडिक और ईएनटी में रेफर किया जाता रहा है, लेकिन अब इन विभागों में पूरी तरह से रेफर बंद है
सभी का हो रहा इलाज
वर्तमान में सामान्य तौर पर 1 हजार से 12 सौ मरीजों को आराम से अस्पताल में संभाला जा सकता है, दिक्कत इस बात की है कि इससे तीन गुना अधिक मरीज आ रहे है। इसके बावजूद डाक्टर उन्हें वापस नहीं भेज रहे हैं: सभी का इलाज किया जा रहा है। कुछ जगहों पर जांच व रिपोर्ट में देरी हो रही है, लेकिन रेफर नहीं किया जा रहा है। सिम्स अस्पताल में लोगों का विश्वास पहले से मजबूत हो चुका है।
-डॉ लखन सिंह, अधीक्षक, सिम्स अस्पताल








