बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत एचआईवी एड्स पर जागरूकता कार्यक्रम

लाइवलीहुड कॉलेज और आईटीआई सकरी में छात्र-छात्राओं को दी एचआईवी से बचाव की जानकारी, दिलाई एचआईवी मुक्त समाज की शपथ

बलौदाबाजार, । कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी अतुल परिहार के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण केन्द्र (हब) द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत जिले में विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में लाइवलीहुड कॉलेज एवं आईटीआई कॉलेज सकरी में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत एचआईवी एड्स को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की आईसीटीसी काउंसलर प्रीति कौशिक ने एचआईवी एड्स के कारण, संक्रमण के विभिन्न पहलुओं तथा इससे बचाव के उपायों की जानकारी दी। इस दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं प्रतिभागियों को एचआईवी मुक्त समाज की शपथ भी दिलाई गई।

कार्यक्रम में प्रीति नवरत्न द्वारा विभिन्न विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ महिला हेल्पलाइन नंबर 181, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, साइबर सुरक्षा हेल्पलाइन 1930, कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम 2013 तथा सखी वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं के संबंध में भी जानकारी दी गई।

जिलेभर में पोषण को लेकर चल रही जागरूकता गतिविधियां

राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जिले में 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और कुपोषण की रोकथाम के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

परियोजना सिमगा के अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्र खरगाडीह, दामाखेड़ा एवं सकरीपार, परियोजना लवन के अंतर्गत अहिल्दा में आधार शिविर, भाटापारा ग्रामीण में बड्डी कार्यक्रम तथा भाटापारा परियोजना के अंतर्गत लावर-1 सहित विभिन्न स्थानों पर पोषण जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

इन गतिविधियों के माध्यम से सैम बच्चों का चिन्हांकन, वजन एवं ऊंचाई सत्यापन, संतुलित आहार, एनीमिया की रोकथाम, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य, स्तनपान, शिशु एवं बाल आहार तथा स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

बच्चों के पोषण और प्रारंभिक विकास पर जोर

आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को ताजा एवं गरम पका हुआ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ उसकी गुणवत्ता एवं स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 0 से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए गृहभेंट के माध्यम से अभिभावकों को उचित पोषण, देखभाल एवं प्रारंभिक उद्दीपन की जानकारी दी जा रही है।

वहीं 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल-आधारित गतिविधियों एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जा रहा है। गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार लेने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने तथा बच्चों के उचित पोषण एवं देखभाल के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है।

राष्ट्रीय पोषण माह के माध्यम से जिले में पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े विषयों पर समुदाय की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

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