- एनआरएलएम और स्व सहायता समूह के सहयोग से ग्रामीण महिला बनी आत्मनिर्भर।
असलम रज़ा,बीजापुर 22 सितम्बर 2026/ ग्रामीण क्षेत्र की रहने वाली सुनीता कुम्मर के लिए परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और नियमित आय का साधन तैयार करना एक बड़ी चुनौती थी। सीमित संसाधनों के बावजूद सुनीता ने हिम्मत नहीं हारी और परिवार की आय बढ़ाने के लिए स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। आज उनकी मेहनत और लगन से किराना दुकान, मछली पालन और चिकन सेंटर जैसे तीन अलग-अलग आजीविका साधन विकसित हो चुके हैं।
*एनआरएलएम से मिला मार्गदर्शन और सहयोग*
सुनीता के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ना एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। स्व सहायता समूह के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण और आजीविका गतिविधियों के संबंध में जानकारी एवं मार्गदर्शन मिला। समूह से मिले सहयोग और आत्मविश्वास के साथ सुनीता ने धीरे-धीरे अपनी आजीविका गतिविधियों का विस्तार करना शुरू किया।
*किराना दुकान से हुई शुरुआत*
सुनीता ने सबसे पहले अपने गांव में किराना दुकान का संचालन शुरू किया। दुकान में ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरत का सामान उपलब्ध कराने से उन्हें नियमित आमदनी होने लगी। दुकान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने, ग्राहकों की जरूरत और सामान की मांग को समझने तथा कमाई का एक हिस्सा दोबारा व्यवसाय में लगाने से उनका छोटा व्यवसाय धीरे-धीरे मजबूत होने लगा।
*मछली पालन से बढ़ी आमदनी*
किराना व्यवसाय के साथ सुनीता ने मछली पालन को भी अपनी आजीविका का हिस्सा बनाया। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने मछली पालन शुरू किया। मछलियों की उचित देखभाल और समय पर बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होने लगी। मछली पालन से हुई आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ ही सुनीता को अपने व्यवसाय में आगे निवेश करने का आत्मविश्वास दिया।
*चिकन सेंटर से बढ़े आय के अवसर*
आय के नए अवसर तलाशते हुए सुनीता ने चिकन सेंटर भी शुरू किया। स्थानीय स्तर पर चिकन की मांग को देखते हुए यह गतिविधि उनके लिए आय का एक और महत्वपूर्ण साधन बन गई। किराना दुकान, मछली पालन और चिकन सेंटर का संचालन करते हुए सुनीता ने अपनी आमदनी के कई स्रोत तैयार किए हैं।
*एनआरएलएम से मिला आत्मविश्वास*
सुनीता बताती हैं कि एनआरएलएम और स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत करने, ऋण का उचित उपयोग करने और स्वरोजगार को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। पहले जहां आर्थिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता रहती थी, वहीं आज वे अपने व्यवसाय के माध्यम से परिवार की आर्थिक जरूरतों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। आज सुनीता कुम्मर आत्मविश्वास के साथ किराना दुकान, मछली पालन और चिकन सेंटर का संचालन कर रही हैं। उनकी मेहनत और लगन ने यह साबित किया है कि सही मार्गदर्शन, समूह का सहयोग और निरंतर प्रयास मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी छोटे स्तर से शुरुआत कर सफल उद्यमी बन सकती हैं। सुनीता की कहानी गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा बन रही है। सुनीता का कहना है कि “मेहनत और हौसले से शुरू किया गया छोटा व्यवसाय भी परिवार की आर्थिक स्थिति को बदल सकता है। एनआरएलएम ने हमें आगे बढ़ने का अवसर और आत्मविश्वास दिया।








