राजनांदगांव।संस्कारधानी राजनांदगांव में आस्था, कला और आधुनिक तकनीक का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला जिसने हर देखने वाले को मंत्रमुग्ध कर दिया। छत्तीसगढ़ की सबसे प्रसिद्ध और भव्य गणेश विसर्जन झांकी उत्सव के दौरान झमाझम बारिश के खलल के बाद जैसे ही मौसम साफ हुआ, पूरा शहर बप्पा की विदाई के रंग में सराबोर हो गया।
निर्धारित समय से एक दिन की देरी से शनिवार रात को शुरू हुआ झांकियों का यह कारवां अगले दिन सुबह तक अनवरत चलता रहा, जिसे देखने के लिए न केवल राजनांदगांव बल्कि पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से भी लाखों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।इस वर्ष के उत्सव में सुरक्षा और अनुशासन को लेकर प्रशासन बेहद मुस्तैद नजर आया, जिसके लिए शहर भर में 800 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की गई थी।
मानव मंदिर चौक से शुरू होकर भारत माता चौक और कामठी लाइन जैसी प्रमुख सड़कों से गुजरने वाले पारंपरिक मार्ग पर रोशनी और भक्ति का ऐसा माहौल था कि पैर रखने तक की जगह नहीं बची। पारंपरिक लोक कला और आधुनिक लाइट्स के फ्यूजन से सजी करीब 35 से अधिक झांकियों ने दर्शकों के बीच खूब वाहवाही बटोरी। हर समिति ने एक से बढ़कर एक अनूठे प्रयोग किए थे, जिसमें इस बार दक्षिण भारतीय लोक संस्कृति पर आधारित ‘कांतारा’ थीम के साथ-साथ त्रिदेव दर्शन, सती दहन, पौराणिक नरसिंह अवतार, भगवान जगन्नाथ की लीला, राम सेतु और कल्कि अवतार के सजीव और गतिशील दृश्यों को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया था।जैसे-जैसे रात परवान चढ़ती गई, झांकियों की भव्यता और बढ़ती गई। बड़ी-बड़ी कलाकृतियों के साथ चल रहे डीजे की धुनों और पारंपरिक धुमाल की थाप पर युवा और बुजुर्ग सभी झूमते नजर आए। रातभर चले इस मनमोहक और ऐतिहासिक आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राजनांदगांव की गणेश विसर्जन झांकी को छत्तीसगढ़ की सबसे भव्य सांस्कृतिक धरोहरों में क्यों गिना जाता है। सुबह तक चले इस उत्सव के बाद नम आंखों और अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों के साथ बप्पा को विदाई दी गई, जिसने हर श्रद्धालु के दिल में एक अमिट याद छोड़ दी।








