बेमेतरा के देवगांव में फसलों की सुरक्षा के नाम पर 22 से अधिक बंदरों की बंदूक से गोली मारकर संदिग्ध हत्या, वन विभाग को मिले कंकाल, जांच तेज

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से बेजुबान जानवरों के प्रति क्रूरता और वन्यजीव अपराध का एक बेहद संवेदनशील और हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है। दाढ़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कुरदा के आश्रित ग्राम देवगांव (डोकरबेला) में किसानों द्वारा अपनी फसलों, फसलों के अंकुरण और बागवानी उत्पादों को बंदरों व आवारा मवेशियों के आतंक से बचाने के लिए एक रखवार (चौकीदार) नियुक्त किया गया था। गांव की व्यवस्था के अनुसार, इस रखवार को पारिश्रमिक के तौर पर प्रत्येक राशन कार्ड धारक से दो किलो चावल देने की सहमति बनी थी। हालांकि, फसलों की रखवाली की आड़ में आरोपी रखवार पर आरोप लगा है कि उसने खेतों में आने वाले बंदरों को केवल डराकर भगाने के बजाय क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं और अपनी बंदूक या एयरगन से उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिससे 22 से अधिक बंदरों की दर्दनाक मौत हो गई।

इस पूरी वारदात का खुलासा तब हुआ जब एक ब्लॉगर ने सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ा एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें सामूहिक रूप से बंदरों को मारे जाने का दावा किया गया। वीडियो के स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल होते ही हड़कंप मच गया और वन्यजीव प्रेमियों तथा ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग और पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। बेमेतरा वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) माधुरी सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की रेस्क्यू और खोजी टीम दाढ़ी पुलिस बल के साथ शनिवार को तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। तीन दिनों तक चले व्यापक सर्च ऑपरेशन और मुआयने के दौरान संयुक्त जांच टीम को खेतों और नदी किनारे के पास से प्राथमिक रूप से दो बंदरों के कंकाल और सड़े-गले अवशेष बरामद हुए हैं। इसके साथ ही एक ग्रामीण जगदीश मानिकपुरी ने जांच टीम को बयान दिया है कि उसने 26 सितंबर के आसपास करीब 8 बंदरों के शवों को पास की नदी में बहते हुए देखा था, जिसके बाद से टीम नदी के बहाव क्षेत्र और झाड़ियों में अन्य शवों की तलाश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं बाकी शवों को साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से छिपाया या ठिकाने तो नहीं लगाया गया है।

प्रशासनिक स्तर पर इस घटना को लेकर अब तक किसी बड़े अधिकारी ने सामूहिक हत्याकांड की अंतिम पुष्टि नहीं की है, क्योंकि प्रारंभिक तौर पर मिले अवशेषों से मौत की सटीक वजह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सकी है। बेमेतरा के एडिशनल एसपी हरीश यादव ने बताया कि पुलिस को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई थी और विभाग पूरी सतर्कता से काम कर रहा है। वन विभाग ने मौके से मिले दोनों बंदरों के कंकालों को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया है और मौत के सही कारणों, समय तथा बंदूक की गोली के निशान की पुष्टि के लिए अवशेषों को उच्च स्तरीय फॉरेंसिक लैब और डीएनए टेस्ट के लिए भेज दिया है। पूछताछ के दौरान फसलों की रखवाली के लिए रखे गए मुख्य संदिग्ध व्यक्ति (कलम पारधी) ने दावा किया है कि वह केवल बंदरों को भगाने का काम करता था और उसने किसी जानवर की जान नहीं ली है, लेकिन वन विभाग और पुलिस की टीमें संदिग्धों और वीडियो अपलोड करने वाले ब्लॉगर को आमने-सामने बिठाकर गहन पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि फॉरेंसिक या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एयरगन या किसी अन्य हथियार से गोली मारे जाने की पुष्टि होते ही दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) और भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत गैर-जमानती केस दर्ज कर तत्काल जेल भेजने की कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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