श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु, सुदामा चरित्र ने भावुक किया

भाटापारा। नेहरू वार्ड में पितरों के मोक्षार्थ एवं वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में भाटापारा निवासी कथा वाचक पं. हरगोपाल शर्मा ने भगवान के विभिन्न चरित्रों एवं प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा स्थल पर ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ सहित बधाई गीतों की गूंज सुनाई दी और श्रद्धालु भक्ति में झूमते-नाचते नजर आए।

कथा वाचक पं. शर्मा ने गज-ग्राह प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि संसार के अधिकांश रिश्ते स्वार्थ से जुड़े होते हैं, इसलिए मनुष्य को सदैव भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए। उन्होंने राम जन्म एवं कृष्ण जन्म की कथा के माध्यम से सूर्यवंश और चंद्रवंश की परंपराओं का भी विस्तार से वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म और पाप बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने माटी खाने, तृणावर्त एवं शकटासुर वध, कालिया नाग के उद्धार तथा अग्नि पान जैसे प्रसंगों का उल्लेख किया और इनके माध्यम से पंचतत्वों की शुद्धि का संदेश समझाया।

सुदामा चरित्र ने बताया सच्ची मित्रता और भक्ति का महत्व

भगवान श्रीकृष्ण के 16,108 विवाहों की कथा के पश्चात पं. शर्मा ने सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में सुदामा जी को कहीं भी दरिद्र नहीं कहा गया है। वे परम संतोषी, धर्मनिष्ठ और भगवान के अनन्य भक्त थे। उन्होंने कहा कि गरीब होना और दरिद्र होना दो अलग-अलग बातें हैं।

पं. शर्मा ने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण को अपने परम मित्र सुदामा के आगमन का समाचार मिला तो वे स्वयं उनका स्वागत करने के लिए दौड़ पड़े। यह प्रसंग भगवान और भक्त के बीच प्रेम, आत्मीयता एवं सच्ची मित्रता की गहराई को दर्शाता है।

श्रीमद् भागवत का श्रवण जीवन को करता है पवित्र

कथा के समापन प्रसंग में पं. हरगोपाल शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार नदियों में गंगा और देवताओं में भगवान विष्णु को श्रेष्ठ माना गया है, उसी प्रकार पुराणों में श्रीमद् भागवत महापुराण का विशेष महत्व है। इसके श्रवण से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और जीवन पवित्र एवं संस्कारित बनता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया।

कथा के दौरान गिरधर व्यास, संजय शर्मा, श्रवण एवं रामशरण ने भजनों की सुमधुर प्रस्तुति दी। भजनों और कथा प्रसंगों से पूरा कथा स्थल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

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