शबरी के बेर, हनुमान मिलन और सीता खोज के प्रसंगों का हुआ भावपूर्ण मंचन
भाटापारा। आदर्श रामलीला नाटक मंडली की 107वें वर्ष की रामलीला के पांचवें दिन गुरुवार रात भगवान श्रीराम और माता शबरी की भेंट, हनुमान मिलन, राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध और सीता खोज के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने सजीव अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया। लीलाओं को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और जय श्रीराम के जयकारों से रामलीला स्थल गूंज उठा।
शबरी की भक्ति और समर्पण ने जीता दर्शकों का मन 
माता सीता की खोज में वन-वन भटकते भगवान श्रीराम और लक्ष्मण महर्षि मतंग के आश्रम पहुंचे। यहां वर्षों से प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा कर रही भक्त शबरी ने उनका भावपूर्ण स्वागत किया। भगवान श्रीराम ने शबरी के प्रेमपूर्वक अर्पित बेर ग्रहण कर भक्ति में प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का महत्व बताया। इसके बाद प्रभु ने शबरी को नवधा भक्ति का ज्ञान दिया। शबरी ने माता सीता की खोज के लिए उन्हें ऋष्यमूक पर्वत की ओर जाने का मार्ग बताया।
हनुमान मिलन के बाद हुई राम-सुग्रीव की मित्रता
ऋष्यमूक पर्वत की ओर जाते समय भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की भेंट ब्राह्मण वेश में आए हनुमानजी से हुई। प्रभु को पहचानते ही हनुमानजी भावविभोर हो गए और दोनों भाइयों को अपने कंधों पर बैठाकर सुग्रीव के पास ले गए। यहां भगवान श्रीराम और सुग्रीव के बीच मित्रता हुई।
सुग्रीव ने अपने भाई बाली द्वारा किए गए अन्याय और राज्य से वंचित किए जाने की व्यथा सुनाई। भगवान श्रीराम ने सुग्रीव को न्याय दिलाने का वचन दिया। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने मित्रता, विश्वास और वचन पालन के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
बाली वध के मंचन से दिया अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का संदेश
रामलीला के अगले प्रसंग में भगवान श्रीराम द्वारा बाली वध का मंचन किया गया। बाली के वध के बाद सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य प्राप्त हुआ। भगवान श्रीराम ने सुग्रीव को उनका अधिकार वापस दिलाने में सहायता की और बाली के पुत्र अंगद को भी अपनी शरण में लिया। इस प्रसंग ने दर्शकों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, मित्रता निभाने और दिए गए वचन का पालन करने की प्रेरणा दी।
सीता की खोज में निकली वानर सेना
इसके बाद सुग्रीव के आदेश पर हनुमानजी, जामवंत, युवराज अंगद, नल-नील सहित वानर सेना माता सीता की खोज में निकलती है। दक्षिणी तट पर पक्षिराज संपाति से वानर सेना को जानकारी मिलती है कि रावण माता सीता का हरण कर लंका ले गया है। इसके बाद जामवंत द्वारा हनुमानजी को उनकी अपार शक्ति का स्मरण कराने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया, जिसने आगामी लंका यात्रा की भूमिका तैयार की।
रामलीला के इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, समर्पण, मित्रता और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कार्यक्रम में दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश आर्य, राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल, पोहा संघ एसोसिएशन के प्रतिनिधि अमर छाबड़िया सहित जयराम, शेखर अग्रवाल, राजेश तिवारी, नंद किशोर वैष्णव, दीपक मिल और अनिल चांडक समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने कलाकारों के अभिनय और प्रस्तुतियों की सराहना की।






