सुवा, कर्मा और पंथी नृत्य की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी हुए सम्मानित
भाटापारा। नगर में आयोजित तीन दिवसीय हिन्द युवा श्री दुर्गा पूजा उत्सव समिति द्वारा आयोजित निःशुल्क रंगीला रास गरबा उत्सव के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। छत्तीसगढ़ी थीम पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर अपनी सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत झलक प्रस्तुत की। सुवा, कर्मा और पंथी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। पारंपरिक गीतों और गरबा की धुनों पर थिरकते प्रतिभागियों ने पूरे माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया।
उत्सव में बच्चे, महिलाएं और युवतियां छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। कोई किसान के रूप में नजर आया, तो कोई आदिवासी वेशभूषा में दिखाई दिया। महिलाओं और युवतियों ने देशी साड़ियों के साथ शादी-ब्याह तथा आदिवासी परंपराओं से जुड़ी पोशाकें पहनकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। उनकी आकर्षक वेशभूषा और प्रस्तुतियों ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
पारंपरिक नृत्य और गरबा की धुनों पर झूमे प्रतिभागी
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी सुवा, कर्मा और पंथी नृत्य की प्रस्तुतियों ने लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। भाटापारा के मुख्य प्रशिक्षक रंगीला साहू के निर्देशन में बच्चों ने चौकड़ी, छकड़ी, डोलिडा और ढाकला की धुनों पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों के उत्साह, कला और पारंपरिक अंदाज को दर्शकों की सराहना मिली। लोक संस्कृति और गरबा का यह अनूठा मेल आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।
विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभागियों को मिला सम्मान
रंगीला रास गरबा नाइट की ओर से विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों और इससे अधिक आयु वर्ग के प्रतिभागियों के लिए अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई थीं। विशेष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा, एक जैसी पोशाक पहनकर समूह में नृत्य करने वाले प्रतिभागियों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।
समिति के सदस्यों के साथ विधायक इंद्र साव ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया। उत्सव के दौरान प्रतिदिन विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे बच्चों और अन्य प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। आयोजन में दर्शकों की आवाजाही, बैठने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक प्रबंध भी सुचारू रूप से किए गए।
संस्कृति और सामाजिक समरसता का उत्सव
विधायक इंद्र साव ने कहा कि मां दुर्गा की आराधना, छत्तीसगढ़िया संस्कृति की झलक और गरबा की मनमोहक धुनों के बीच उत्सव के दूसरे दिन भी उत्साह एवं उमंग का अद्भुत संगम देखने को मिला। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को सहेजने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने सभी से मिलकर संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता के इस उत्सव को यादगार बनाने का आह्वान किया।






