- राजनीतिक संवाद से किसानों के हितों को मिलेगी नई दिशा
दीपक अवस्थी,डोंगरगांव।लोकतंत्र की मजबूती सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद से बढ़ती है। नेहरू द्वारा युवा अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिभा की सराहना और राजीव गांधी के कार्यकाल में उन्हें इलाज के लिए अमेरिका जाने में मिली सहायता राजनीतिक मतभेदों के बीच सम्मान और संवेदनशीलता के उदाहरण हैं। छत्तीसगढ़ में विधायक दलेश्वर साहू के फार्म हाउस पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम का पहुंचना भी इसी संवाद की सकारात्मक कड़ी है। यहां एफपीओ ने किसानों की समस्याएं रखीं, जिन पर मंत्री ने सुधार और कार्रवाई का आश्वासन दिया।
- दो साल से वर्षा का डेटा नहीं भेजने का मुद्दा
एफपीओ कृषि अनुसंधान एवं ज्ञान प्रबंधन फार्मर प्रोड्यूसर संस्था ने बताया कि उद्यानिकी विभाग के अंतर्गत वर्षा मापक यंत्रों से मिलने वाले आंकड़े फसल बीमा के आकलन में महत्वपूर्ण होते हैं। संस्था का आरोप है कि पिछले दो साल से उद्यानिकी विभाग ने संबंधित डेटा शासन को नहीं भेजा जा रहा है, जिससे किसानों को फसल बीमा का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है। संगठन से करीब 1000 किसान जुड़े हैं। संस्था ने व्यवस्था दुरुस्त कर किसानों को बीमा का लाभ दिलाने की मांग की।
- ऑटोमेशन सिस्टम लागू करने की मांग
मोबाइल से पता चलेगी फसल की जरूरत। संस्था ने ऑटोमेशन सिस्टम लागू करने की मांग भी रखी सेंसर आधारित इस तकनीक से मोबाइल के माध्यम से फसलों में पानी और दवाइयों की जरूरत का आकलन किया जा सकता है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना के अंतर्गत 2 साल से यह योजना आई है लेकिन इस सिस्टम की लागत करीब 40 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी का प्रावधान है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ बीज निगम में सब्सिडी निर्धारण और उपयुक्त एजेंसी तय नहीं कर रही है। कृषि मंत्री ने इस दिशा में सुधार का आश्वासन दिया।
- देश का चौथा किसान सुविधा केंद्र वाला राज्य बनेगा छत्तीसगढ़
किसान सुविधा केंद्र देशभर में अभी तक केवल तीन राज्यों में बना है छत्तीसगढ़ में सभी उपकरणों के साथ इसे बनाया जाएगा तो यह देश में चौथा स्थान हासिल करेगा। वर्तमान में भवन बना, लेकिन जांच उपकरण नहीं मिले।पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में अलीवारा में किसान सुविधा केंद्र का भवन बनाया गया था। यहां बिजली, पानी और सड़क की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन मिट्टी और पौधों की जांच के लिए आवश्यक उपकरण नहीं हैं। उपकरण मिलने पर किसान मिट्टी की उर्वरता, पौधों की स्थिति और फसलों में होने वाली बीमारियों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। एफपीओ ने केंद्र को जांच सुविधाओं से लैस करने की मांग कृषि मंत्री से की।
- इन मशीनों की आवश्यकता
- पीएसएम
- एटॉमिक एब्जॉर्प्शन स्पेक्ट्रोफोटोमीटर
- हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी
- एक्स-रे फ्लोरेसेंस
- नियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी
- पीएच मीटर
- ओनी
- टेक्सास कोन पेनेट्रोमीटर
- नाइट्रोजन एनालाइजर
- किसान समृद्धि योजना फिर शुरू करने की मांग
संस्था ने किसान समृद्धि योजना के अंतर्गत किसानों को मिलने वाली 15 हजार रुपए प्रति एकड़ की सहायता राशि का मुद्दा उठाया। संस्था के अनुसार, योजना का लाभ न मिलने से किसानों को आर्थिक परेशानी हो रही है। योजना का लाभ शुरू करने की मांग पर कृषि मंत्री ने आश्वासन दिया।
- ओ-फॉर्म मिलने से उर्वरक कंपनियों की बढ़ेगी संख्या
एफपीओ ने ओ-फॉर्म उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। संस्था का कहना है कि इससे किसानों को पर्याप्त मात्रा उर्वरक मिल पाएगी। किसानों का समय बचेगा। अभी चार कंपनियां से खाद मिल रही है लेकिन इनकी संख्या सात होने से पर्याप्त मात्रा में खाद मिल पाएगी।
- संवाद की सार्थकता ठोस परिणामों से तय होगी
राजनीतिक सौहार्द की यह पहल मतभेदों के बीच समाधान तलाशना के लिय हुई। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में इस तरह का संवाद सार्थक होगा, किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। राजनीतिक परिपक्वता का आकलन नेताओं के साथ उनके साझा प्रयासों से जनता को मिलने वाले लाभ अब मिलेगा।
- क्या है एफपीओ?
केंद्र सरकार का उपक्रम एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठन के अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं ज्ञान प्रबंधन फार्मर प्रोड्यूसर संस्था के सदस्य किसानों को एक मंच पर जोड़कर कृषि सामग्री, तकनीकी जानकारी और उपज के विपणन में सहयोग करता है। इसके माध्यम से किसान सामूहिक रूप से अपनी जरूरतों के लिए प्रयास कर सकते हैं। कृषि अनुसंधान एवं ज्ञान प्रबंधन फार्मर प्रोड्यूसर संस्था से मिली जानकारी के अनुसार, इससे करीब 1000 किसान जुड़े हैं। जो भविष्य में लाखों किसानों तक केंद्रित है।






