एकीकृत विद्युत टेंडर के विरोध में लामबंद हुए ठेकेदार, भूख हड़ताल का किया ऐलान पचास सालों से बिजली व्यवस्था संभाल रहे स्थानीय ठेकेदारों का सवाल – हम कहां जाएं: वैष्णव

संदीप यादव लोरमीमुंगेली ।छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के 1,193.46 करोड़ रुपये के एकीकृत टेंडर का स्थानीय विद्युत ठेकेदारों ने विरोध शुरू कर दिया है। कन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने इस टेंडर प्रक्रिया का बहिष्कार करने और 27 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर जाने की घोषणा की है।

स्थानीय विद्युत ठेकेदार निलेश कुमार वैष्णव भूख हड़ताल पर बैठेंगे। जारी टेंडर विज्ञापन में फ्यूज ऑफ कॉल, वार्षिक रखरखाव तथा वितरण ट्रांसफार्मर, एलटी, 11 केवी और 33 केवी नेटवर्क के ब्रेकडाउन मेंटेनेंस के लिए टीमों की तैनाती का प्रावधान है।

एसोसिएशन का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर कार्यों को एकीकृत करने से छोटे एवं स्थानीय ठेकेदारों के लिए सीधे काम प्राप्त करने के अवसर सीमित होने की आशंका है। निलेश कुमार वैष्णव ने कहा, हम स्थानीय ठेकेदार पिछले लगभग पचास वर्षों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रदेश की बिजली व्यवस्था में योगदान देते आ रहे हैं। धूप, बारिश और आपात परिस्थितियों में हमारी श्रमिक और हमारी टीमें मैदान में काम करती रही हैं। आज हमारी बात सुनने वाला कोई नहीं है। यदि काम बड़ी कंपनियों के हाथों में केंद्रित कर दिया जाएगा तो छोटे ठेकेदार कहां जाएंगे? हमारे परिवारों और हमसे जुड़े श्रमिकों का घर कैसे चलेगा?

एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि स्थानीय ठेकेदारों की समस्याओं और उनकी भागीदारी पर पर्याप्त चर्चा किए बिना ऐसी व्यवस्था आगे बढ़ाई जा रही है, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित हो सकता है। संगठन ने इसे स्थानीय रोजगार, स्वरोजगार और प्रदेश के छोटे उद्यमियों के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा बताया है।

एसोसिएशन की यह है प्रमुख मांगें- एसोसिएशन की मांग है कि विवादित एकीकृत टेंडर पर तत्काल रोक लगाकर स्थानीय ठेकेदारों के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए। कार्यों को छोटे, व्यवहारिक पैकेजों में विभाजित किया जाए, ताकि पात्र स्थानीय ठेकेदार प्रतिस्पर्धा में भाग ले सकें। टेंडर की पात्रता एवं वित्तीय शर्तों में छोटे और स्थानीय ठेकेदारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। स्थानीय श्रमिकों के रोजगार और अनुभवी ठेकेदारों की आजीविका की सुरक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। श्री वैष्णव ने कहा, हम अपने काम का सम्मान और अपने परिवारों के लिए रोजी-रोटी का अधिकार मांग रहे हैं। प्रदेश की बिजली व्यवस्था में वर्षों से योगदान देने वालों को दरकिनार करना स्वीकार नहीं है। सरकार और कंपनी प्रबंधन हमारी बात सुनें तथा न्यायसंगत निर्णय लें। एसोसिएशन ने सभी स्थानीय विद्युत ठेकेदारों से एकजुट होकर शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होने और भूख हड़ताल करने का आह्वान किया है।

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