रायपुर।बंगाल की खाड़ी में उठे भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के चलते छत्तीसगढ़ के मौसम में भारी बदलाव आया है और कई जिलों में संकट की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग द्वारा जारी भारी से अति भारी बारिश के रेड अलर्ट और 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं की चेतावनी को देखते हुए राज्य प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आवागमन में होने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए बस्तर संभाग और आसपास के मैदानी इलाकों के कुल 8 प्रभावित जिलों में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने का आधिकारिक आदेश जारी किया गया है।
इस बड़े फैसले के तहत राजनांदगांव जिला प्रशासन ने कलेक्टर के अनुमोदन पर 28 अक्टूबर 2026, दिन बुधवार को जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में एक दिवसीय अवकाश घोषित किया है। राजनांदगांव और मोहला मानपुर के अलावा सुरक्षा के लिहाज से बस्तर संभाग के सात अन्य जिलों—बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर—में भी स्कूलों को बंद रखने का निर्देश दिया गया है। विशेष रूप से नारायणपुर जिले में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दो दिनों यानी 28 और 29 अक्टूबर तक के लिए अवकाश घोषित किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसके दायरे में सभी शासकीय, अशासकीय (प्राइवेट), अनुदान प्राप्त प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों के साथ-साथ आंगनवाड़ी केंद्र भी शामिल रहेंगे।
प्रशासन ने इस बात को साफ किया है कि यह छुट्टी केवल छात्र-छात्राओं के लिए लागू होगी ताकि उन्हें भारी जलभराव और खराब मौसम में स्कूल आने-जाने की कठिनाई से बचाया जा सके, जबकि स्कूल के शिक्षकों और अन्य स्टाफ को प्रशासनिक और सुरक्षा कार्यों के लिए ड्यूटी पर उपस्थित रहना होगा। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस चक्रवात के असर से बस्तर से लेकर बिलासपुर और दुर्ग संभाग तक मूसलाधार बारिश हो सकती है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने पूरे प्रदेश में करीब 779 राहत शिविर तैयार रखे हैं और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बचाव दल को हाई अलर्ट पर रखा गया है। आम जनता से भी अपील की गई है कि वे भारी बारिश के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और बच्चों को जलभराव वाले क्षेत्रों या बिजली के खंभों से दूर रखें।







