ब्रजेश पाण्डे,दंतेवाड़ा: देश में मतदाता सूची से फर्जी और डुप्लीकेट नाम हटाए जाने के अभियान के बाद सियासत गर्मा गई है।
एक पोस्टर में सवाल उठाया गया है कि _यदि बूथ लेवल पर लाखों फर्जी पहचान-पत्र और डुप्लीकेट वोट हटाए जा रहे हैं, तो फिर 10 जनपथ में मातम क्यों?_
पोस्टर के अनुसार आयोग की कार्रवाई के 3 बड़े बिंदु सामने आए हैं:
1. *बूथ लेवल पर सफाई*: लाखों फर्जी पहचान-पत्र और डुप्लीकेट वोट हटाए गए।
2. *अवैध घुसपैठियों पर कार्रवाई*: रोहिंग्या और अवैध घुसपैठियों के बोगस नामों पर आयोग का चाबुक चला।
3. *वोट-बैंक सिंडिकेट ध्वस्त*: दशकों पुराना अवैध तुष्टीकरण वोट-बैंक सिंडिकेट एक झटके में ध्वस्त हुआ।
पोस्टर में झाड़ू के जरिए “फर्जी वोट”, “डुप्लीकेट वोट”, “अवैध घुसपैठिया” और “रोहिंग्या” वाले कार्ड्स को कचरे के डिब्बे में फेंकते दिखाया गया है। साथ में नारा दिया गया है – *”साफ वोटर लिस्ट से”*।
इस पूरे मुद्दे पर *नगरपालिका अध्यक्ष पायल गुप्ता ने कहा कि “कांग्रेसियों को इतनी परेशानी क्यों है?”*
उन्होंने कहा कि _क्या पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है?_ *वोटर लिस्ट की शुद्धता ही लोकतंत्र की मजबूती का आधार है।*
फिलहाल इस पोस्टर और बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज है। सत्ता पक्ष इसे चुनाव सुधार बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे निशाना बनाने का आरोप लगा रहा है।







