राजनांदगांव।राजनांदगांव नगर पालिक निगम द्वारा आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम में उस समय सियासी हलचल मच गई जब शिलापट्ट पर महापौर मधुसूदन यादव का नाम ही नहीं था। महापौर के नाम की गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक हल्कों में जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है।
नगर पालिक निगम, राजनांदगांव की ओर से अधोसंरचना मद अंतर्गत 20 लाख रुपये की लागत से पूर्व मंत्री स्व. लीलाराम भोजवानी की स्मृति में स्वागत द्वार निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक डॉ. रमन सिंह मौजूद थे। साथ ही मंत्री अरुण साव, विजय शर्मा और संतोष पांडेय जैसे दिग्गज नेताओं ने शिरकत की।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री, विधायक और पार्षदों समेत कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन शिलापट्ट पर महापौर मधुसूदन यादव का नाम न होना सभी को चौंका गया। नगर निगम का कोई भी आधिकारिक कार्यक्रम हो और महापौर का नाम गायब रहे, यह अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है।
कुछ लोगों का कहना है कि यह जानबूझकर किया गया बहिष्कार है और सत्ता पक्ष महापौर की उपेक्षा कर रहा है। वहीं बीजेपी खेमे का कहना है कि यह आयोजन नगर निगम प्रशासन का है और नाम छूटना महज तकनीकी चूक हो सकती है।
महापौर का नाम शिलापट्ट से गायब होना अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। लोग यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या यह अनजाने में हुई गलती है या फिर इसके पीछे कोई सियासी रणनीति छिपी है?
जो भी हो, भूमिपूजन कार्यक्रम से महापौर मधुसूदन यादव का नाम का न होना नगर की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह मामला कितना आगे बढ़ता है , यह देखने योग्य है।





