Thursday, February 26, 2026
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    स्कूल में साइकिल वितरण के दौरान बच्चों को ट्रैक्टर चलाने पर विवाद

    बिलाईगढ़। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सलौनीकला एक बार फिर विवादों में है। आरोप है कि प्रभारी प्राचार्य कुमार चौहान की लापरवाही के कारण स्कूल के छात्रों की जान जोखिम में पड़ गई। शासन की योजना के तहत सलौनीकला की बच्चियों को साइकिलें दी जानी थीं। बुधवार को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम प्रेमभुवन प्रताप सिंह शासकीय विद्यालय में साइकिल वितरण का आयोजन हुआ और इन्हें सलौनीकला विद्यालय तक पहुँचाने की जिम्मेदारी स्थानीय प्राचार्य और प्रतिनिधि को दी गई।मगर वितरण के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई। बताया जा रहा है कि लड़कों को ट्रैक्टर से साइकिलें ढुलाई करने के लिए लगाया गया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से ट्रैक्टर बच्चों द्वारा ही चलाया गया। ट्रैक्टर में साइकिलें रखकर छात्रों ने खुद इसे स्कूल तक ले जाया। बच्चों द्वारा ट्रैक्टर चलाते हुए वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसने मामले की गंभीरता और बढ़ा दी। यह लापरवाही कई सवाल खड़े करती है। यदि इस दौरान कोई दुर्घटना होती तो जिम्मेदारी किसकी होती? बच्चों को बिना सुरक्षा उपकरण और निगरानी भारी वाहन चलाने देना स्कूल प्रबंधन पर सीधे सवाल खड़ा करता है। इस मामले ने स्कूल और प्राचार्य की सुरक्षा प्रबंधन क्षमता पर सवाल उठाए हैं. मामले पर प्रभारी प्राचार्य कुमार चौहान ने कहा कि यह केवल “थोड़ी सी गलती” थी। उनका यह बयान विवाद का केंद्र बन गया है। सवाल यह उठता है कि क्या प्राचार्य की जिम्मेदारी नहीं थी कि ट्रैक्टर को सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से स्कूल तक पहुँचाया जाए। इस घटना की जानकारी जिलाशिक्षाधिकारी जे. आर. डहरिया को दी गई। उन्होंने कहा कि मामले की गहन जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की निगाहें अब इस मामले पर टिकी हैं कि वे इस लापरवाही को कितनी गंभीरता से लेते हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने भी घटना पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए और इस तरह की घटनाओं से बच्चों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि शासकीय योजनाओं में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। इस तरह की लापरवाहियां न केवल आर्थिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाती हैं, बल्कि बच्चों और अभिभावकों के विश्वास को भी कमजोर करती हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग प्रभारी प्राचार्य और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं। क्या मामला औपचारिकता में निपट जाएगा या बच्चों की सुरक्षा और स्कूल प्रशासन में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह घटना बिलाईगढ़ जिले में विद्यालयों में सुरक्षा प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के निष्पादन पर नया चर्चा विषय बन गई है।

     

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