रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा लागू की गई सुशासन और शांति की नीतियों का असर तेजी से दिखाई देने लगा है। बस्तर में आतंक का पर्याय रहे माओवादी अब हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की पुनर्वास योजनाओं से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को प्रदेश में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। कुल 65 लाख रुपए के इनाम वाले 10 माओवादी आत्मसमर्पण कर सरकार के समक्ष शांति का मार्ग अपनाने के लिए तैयार हुए हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम 25 लाख के इनामी चैतू उर्फ श्याम दादा, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का वरिष्ठ सदस्य, शामिल है। चैतू लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना हुआ था और कई बड़ी नक्सली घटनाओं का मास्टरमाइंड माना जाता था। उसके सरेंडर को सुरक्षा एजेंसियों और सरकार की रणनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार की “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और बस्तर के लिए विशेष रूप से तैयार की गई “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” योजना ने संघर्ष और भय के बीच रहने वालों के लिए एक नई आशा और नई दिशा प्रदान की है।





