Wednesday, February 25, 2026
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    पहले हाथी, फिर तेंदुआ, लो अब बाघ भी आ गया, लगातार जंगली जानवरों की आमद से जंगल में रौनक

    मोहला-मानपुर। जिले में बीते-5-6 सालों में हिंसक जंगली जानवरों की आमद नजर आ रही है. पहले हाथी, उसके बाद तेंदुआ, और अब बाघ के आने की पुष्टि हुई है. लगातार जंगली जानवरों की आमद से जंगल में रौनक है, लेकिन बस्ती में खौफ का आलम है.कल जिले के दक्षिण वन परिक्षेत्र में बाघ की आमद सामने आई थी. बाघ द्वारा एक पालतू गाय का शिकार भी किया गया है. जिले के वन मंडलाधिकारी दिनेश पटेल ने बाघ के पगमार्क, जंगल में कैमरे की तस्वीरें व अन्य जानकारियां साझा करते हुए बताया कि 1 दिसंबर को मानपुर दक्षिण वन परिक्षेत्र अंतर्गत औंधी तहसील क्षेत्र के ग्राम नवागढ़ में एक पालतू गाय को जंगली जानवर द्वारा शिकार किए जाने की सूचना मिली थी.

    सूचना उपरांत क्षेत्रीय वन अमले ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया. मौका मुआयना के दरमियान वन भूमि कक्ष क्रमांक 1080 में गांव के इर्द-गिर्द बाघ के पगमार्क देखे गए. वहीं गांव से कुछ दूर जंगल में गाय की क्षत-विक्षत लाश भी मिली है. डीएफओ दिनेश पटेल ने बताया कि तेंदुआ और चीता जैसे जानवर भारी-भरकम गाय को उठाकर ले जाने में आमतौर पर असमर्थ होते हैं, ऐसे में इस बात में कोई दोराय नहीं कि जंगल में मिले पगमार्क बाघ के ही हैं।

    पेड़ों में लगाए गए तीन कैमरे

    डीएफओ के मुताबिक, चूंकि बाघ एक गाय का शिकार कर चुका है, इसलिए शिकार की लालच में बाघ के यहां दोबारा आने की प्रबल संभावना है. यही वजह है कि आज दक्षिण वन परिक्षेत्र अंतर्गत नवागढ़ गांव से लगे वन भूमि कक्ष क्रमांक 1080 में अलग-अलग स्थानों में पेड़ों पर तीन कैमरे लगाए गए।

    महाराष्ट्र से दाखिल हुआ छत्तीसगढ़

    डीएफओ पटेल के मुताबिक, महाराष्ट्र सीमा के करीब ही बाघ की आमद हुई है. ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि बाघ महाराष्ट्र की ओर से विचरण करते हुए छत्तीसगढ़ में दाखिल हुआ हो. उन्होंने जल्द कैमरे के जरिए बाघ की और भी जानकारी हासिल हो जाने की उम्मीद जताई है. दूसरी ओर क्षेत्रवासी ग्रामीणों को अकेले जंगल में नहीं जाने, सतर्कता बरतने और सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है. वहीं क्षेत्रीय वन महकमा भी अलर्ट है।

    बस्ती में खौफ का आलम

    बता दें कि बीते कुछ वर्षों से हिंसक जंगली जानवरों की चहलकदमी मोहला-मानपुर जिले के जंगल में लगातार बनी हुई है. 5-6 साल पहले पूर्व की बात करें तो जंगली हाथियों का दिखना इस क्षेत्र में दुर्लभ ही था. लेकिन इन सालों में यहां लगातार हाथी जंगल से होते हुए बस्ती में भी आ रहे हैं, और जान-माल की हानि भी कर रहे हैं. करीब साल दो साल से तेंदुए का आतंक भी जिले के जंगल व बस्तियों में सामने आया है. हाथी, तेंदुए के बाद अब टाइगर की आमद हुई है. हिंसक जंगली जानवरों की आमद से बस्ती में खौफ का आलम है।

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