डोंगरगांव में प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में पदस्थ युवा अफसर ने युवाओं को दिया संदेश – मेहनत के साथ सही रणनीति जरूरी
डोंगरगांव(दीपक अवस्थी)।जब पिता देश की सरहद पर वर्दी पहनकर ड्यूटी कर रहे हों और मां घर पर बेटे के सपनों को संवार रही हो, तब उस घर के सपनों में भी देश सेवा की खुशबू होती है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है डोंगरगांव थाना में प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में पदस्थ आदित्य कुमार की, जिन्होंने महज 23 साल की उम्र में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की कठिन परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का सपना साकार किया।
ऑल इंडिया रैंक 861 हासिल कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में ईमानदारी हो तो सफलता जरूर मिलती है।
आदित्य के पिता उमाशंकर सीआरपीएफ में पदस्थ हैं और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में तैनात हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता को देश सेवा करते देखा, जिसने उनके मन में भी वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना जगा दिया। उनकी माता सुमन देवी गृहिणी हैं, जिन्होंने हमेशा बेटे के सपनों को हौसला दिया।
आदित्य बताते हैं कि सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य उन्होंने पहले ही तय कर लिया था। इसी वजह से उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की, ताकि पढ़ाई के साथ प्रतियोगी माहौल का लाभ मिल सके।
तैयारी के दिनों को याद करते हुए वे बताते हैं कि सफलता आसान नहीं थी। रोज करीब 8 घंटे नियमित पढ़ाई, अनुशासित जीवन और पूरी तरह लक्ष्य पर फोकस रखना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उस दौरान उन्होंने न त्योहारों की खुशियां मनाईं और न ही किसी फेस्टिवल में शामिल हुए।
दिलचस्प बात यह है कि 12वीं कक्षा में उन्होंने गणित विषय से पढ़ाई की थी, लेकिन यूपीएससी मुख्य परीक्षा में इतिहास को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना।
सफलता की राह में उन्हें असफलता का सामना भी करना पड़ा। पहले प्रयास में परीक्षा पास नहीं हो सकी। उस समय निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कमियों को समझा, रणनीति बदली और दूसरे प्रयास में सफलता हासिल कर आईपीएस बनने का सपना पूरा कर लिया।
फरवरी 2024 में हुए यूपीएससी इंटरव्यू के दौरान उनसे समसामयिक मुद्दों पर सवाल पूछे गए, जिसमें बांग्लादेश में हो रहे प्रदर्शनों से जुड़ा प्रश्न भी शामिल था।
आज के युवाओं को संदेश देते हुए आदित्य कहते हैं कि सोशल मीडिया का सही उपयोग पढ़ाई में मददगार हो सकता है। यूट्यूब, न्यूज प्लेटफॉर्म और एआई तकनीक से समसामयिक जानकारी ली जा सकती है। उनका मानना है कि यूपीएससी की तैयारी के लिए कोचिंग जरूरी नहीं है, यदि छात्र अनुशासन के साथ सेल्फ स्टडी करें तो सफलता हासिल की जा सकती है।
फिलहाल आदित्य कुमार डोंगरगांव में प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में पदस्थ हैं और उनका कहना है कि अब उनका लक्ष्य बेहतर पुलिसिंग के माध्यम से क्षेत्र और समाज की सेवा करना है।





