दिल्ली। भारत में ईंधन संकट गहराने की आशंका के बीच भारतीय नौसेना संकटमोचक की भूमिक निभा सकती है। खबर है कि भारत की तरफ से अपने युद्धपोत भेजने पर विचार किया जा रहा है, ताकि मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय जहाजों को निकाला जा सके। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के बीच संघर्ष के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोनों ओर बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट में भारतीय अधिकारी कैप्टन पीसी मीणा के हवाले से लिखा कि भारत भी अपने युद्धपोत भेजने पर विचार कर रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय जहाज मालिकों की तरफ से एस्कॉर्ट का अनुरोध किया गया था, जिसके बाद युद्धपोत भेजने के फैसले पर विचार किया जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान नौसेना ने सोमवार को कहा कि वह अपने जहाजों को निकालने के लिए युद्धपोतों को मिडिल ईस्ट भेज रहा है। साथ ही कहा कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी के दो जहाज पहले ही नौसेना की निगरानी में आ गए हैं। हालांकि, नौसेना ने यह जानकारी नहीं दी कि किन रास्तों के जरिए टैंकर लाए जा रहे हैं। पाकिस्तान अधिकांश नेचुरल गैस कतर और कच्चा तेल सऊदी अरब और यूएई से आयात करता है। न्यूज़ एजेंसी के हवाले से लिखा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की और उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने को कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और कीमत पर पश्चिम एशिया संघर्ष का असर न झेलना पड़े। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी सक्रिय रूप से यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर न भुगतना पड़े, क्योंकि भारत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयातक है। प्रधानमंत्री ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक कर देश में ऊर्जा की स्थिति पर चर्चा की।





