रायपुर।रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत इन्द्रप्रस्थ फेस-2 EWS परिसर के रहवासियों को ए.सी. यूनिट हटाने संबंधी जारी किया गया पत्र बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, असंवेदनशील और गरीब विरोधी सोच को दर्शाता है। इस आदेश ने उन गरीब, मजदूर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को गहरी मानसिक पीड़ा दी है, जो दिन-रात मेहनत कर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी और गर्मी से थोड़ी राहत जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
EWS आवास योजना उन लोगों के लिए बनाई गई थी जिनके पास संसाधन सीमित हैं, जो मजदूरी कर, छोटी नौकरी कर या कर्ज लेकर अपने परिवार को बेहतर जीवन देने की कोशिश करते हैं। ऐसे परिवार जब अपने बच्चों, बुजुर्ग माता-पिता और महिलाओं को भीषण गर्मी से बचाने के लिए बड़ी मुश्किल से एक छोटा ए.सी. लगाते हैं, तब प्रशासन की ओर से उन्हें नोटिस देकर डराया जा रहा है।
आज प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ रहा है। छोटे-छोटे कमरों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए गर्मी किसी सजा से कम नहीं है। जिन घरों में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग रहते हैं, वहां ए.सी. या कूलर कोई विलासिता नहीं बल्कि जरूरत बन चुकी है। लेकिन जिस तरह से नोटिस जारी कर कहा जा रहा है कि ए.सी. हटाओ वरना कार्रवाई होगी, उससे ऐसा महसूस हो रहा है मानो गरीब आदमी को आराम से जीने का भी अधिकार नहीं है।
प्राधिकरण द्वारा यह कहा गया है कि ए.सी. चलने से विद्युत भार बढ़ रहा है और वायरिंग जलने जैसी समस्या हो सकती है। यदि वास्तव में तकनीकी समस्या है तो प्रशासन का दायित्व बनता है कि वह गरीब परिवारों के लिए बेहतर बिजली व्यवस्था, सुरक्षित वायरिंग और वैकल्पिक समाधान उपलब्ध कराए। लेकिन समस्याओं का समाधान करने की बजाय सीधे गरीबों पर कार्रवाई की चेतावनी देना पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अमानवीय है।
एक तरफ सरकार गरीब कल्याण, सबका साथ-सबका विकास और बेहतर जीवन की बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ गरीबों को इस प्रकार के नोटिस देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। बड़े-बड़े बंगलों और कॉलोनियों में दर्जनों ए.सी. चलाने वालों पर कोई सवाल नहीं उठता, लेकिन जब गरीब आदमी अपने बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए एक ए.सी. लगाता है तो उसे नियमों और कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। इससे आम जनता में भारी नाराजगी है।
यह सिर्फ ए.सी. हटाने का मामला नहीं है, बल्कि गरीबों के सम्मान, उनके अधिकार और उनकी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ा विषय है। क्या गरीब परिवारों को अपने बच्चों को गर्मी से राहत देने का अधिकार नहीं? क्या सुविधाएं केवल अमीर लोगों के लिए हैं?
हम रायपुर विकास प्राधिकरण से मांग करते हैं कि इस आदेश पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए और रहवासियों के साथ चर्चा कर मानवीय एवं व्यवहारिक समाधान निकाला जाए। यदि बिजली भार बढ़ने की समस्या है तो विद्युत व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ना कि गरीब परिवारों को परेशान किया जाए।
गरीब और मजदूर वर्ग भी इस समाज का हिस्सा हैं। उन्हें भी सम्मानपूर्वक और सुरक्षित जीवन जीने का पूरा अधिकार है। प्रशासन को चाहिए कि वह गरीबों की परेशानियों को समझे और ऐसा कोई कदम ना उठाए जिससे आम जनता में सरकार की छवि खराब हो।
“गरीब के घर का ए.सी. कोई शौक नहीं, उसके परिवार की जरूरत और राहत है।”





