रायपुर।छत्तीसगढ़ में साल 2026 की नई तबादला नीति का इंतजार अब लंबा होता जा रहा है. प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारी और शिक्षक इस उम्मीद में बैठे हैं कि सरकार जल्द ही नई पॉलिसी की घोषणा करेगी, लेकिन जून का महीना बीत जाने के बावजूद अब तक कोई आधिकारिक गाइडलाइन जारी नहीं की गई है. इस देरी के कारण प्रशासनिक हलकों और कर्मचारी संगठनों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
शिक्षक और अन्य संवर्ग के कर्मचारी पारिवारिक, स्वास्थ्य और प्रशासनिक कारणों से ट्रांसफर की आस लगाए बैठे हैं. नीति में हो रहे विलंब ने उनकी चिंताओं को बढ़ा दिया है. वहीं, अब इस मुद्दे पर राज्य में राजनीति भी गरमाने लगी है। पारदर्शिता के साथ जल्द जारी हो नीति
छत्तीसगढ़ टीचर एसोसिएशन सहित कई प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार से जल्द से जल्द तबादला नीति जारी करने की अपील की है. संगठनों का कहना है कि सरकार को इस बार बेहद स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाने चाहिए, ताकि बिना किसी सिफारिश के पात्र कर्मचारियों को समय पर राहत मिल सके. गौरतलब है कि पिछले साल राज्य सरकार ने 6 जून से 25 जून के बीच तबादलों के लिए विंडो खोली थी. इस बार जून का पूरा महीना बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया शुरू न होने से कर्मचारियों में निराशा का माहौल है।
कांग्रेस का ‘नारियल’ कोड वर्ड वाला तंज
नीति में हो रही देरी अब सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं रह गई है, बल्कि इस पर छत्तीसगढ़ की सियासत भी गरमा गई है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं. बैज ने तंज कसते हुए कहा कि जब तक “तबादलों का रेट” तय नहीं होगा, तब तक नीति सामने नहीं आएगी. उन्होंने यह भी दावा किया कि मौजूदा शासन में पोस्टिंग और ट्रांसफर के खेल में ‘नारियल’ जैसे कोड वर्ड्स का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है।
‘भ्रष्टाचार का रिकॉर्ड बनाने वालों को बोलने का हक नहीं’
कांग्रेस के इन आरोपों पर सत्ताधारी दल भाजपा ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है. भाजपा प्रवक्ता राजीव चक्रवर्ती ने विपक्ष के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में ट्रांसफर-पोस्टिंग एक बड़ा उद्योग बन चुका था, जहां सिर्फ कमीशनखोरी चलती थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भूपेश बघेल सरकार ने भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित किए थे।






