छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर के AIIMS Raipur में निधन हो गया। वह 72 वर्ष की थीं और लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं।पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचानतीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में हुआ था। उन्होंने 13 साल की उम्र से ही पंडवानी गायन शुरू कर दिया था। उस समय महिलाएं केवल बैठकर ‘वेदमती शैली’ में गाती थीं, लेकिन उन्होंने पुरुषों की ‘कापालिक शैली’ चुनी और खड़े होकर गाकर इतिहास रचा। महाभारत की कथाओं को अपनी सशक्त आवाज़ और जीवंत अभिनय से मंच पर उतारने वाली तीजन बाई ने पंडवानी को देश-विदेशों तक नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।प्रमुख सम्मान और उपलब्धियांभारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें कई सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा गया -पद्मश्री (1988)संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995)पद्म भूषण (2003)जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (1999)पद्म विभूषण (2019)तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला जगत में शोक की लहर है।
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का निधन






