धरसींवा( विद्याभूषण वर्मा )। छत्तीसगढ़ के धरसींवा क्षेत्र में इन दिनों बिजली उपभोक्ताओं, विशेषकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के घरों में भारी-भरकम बिजली बिलों का एक ऐसा पहाड़ टूट पड़ा है, जिसने उनकी कमर तोड़कर रख दी है। शासन-प्रशासन द्वारा आधुनिकता और सुविधा के नाम पर लगाए जा रहे नए स्मार्ट मीटर अब आम जनता के लिए राहत का सबब बनने के बजाय एक बड़ी मुसीबत साबित हो रहे हैं। धरसींवा के तमाम गांवों और कॉलोनियों में अचानक बेतहाशा बढ़े हुए बिलों को लेकर जनता का धैर्य अब जवाब दे चुका है, जिसके चलते बिजली विभाग और सरकार के खिलाफ चौतरफा भारी आक्रोश की लहर दौड़ गई है।
बिल देखकर उड़े होश, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
क्षेत्र के पीड़ित उपभोक्ताओं का सीधा आरोप है कि जब से उनके घरों के पुराने मीटरों को बदलकर ये नए स्मार्ट मीटर टांगे गए हैं, तब से बिजली का बिल दोगुने से लेकर तीन गुना तक उछल गया है। जो दिहाड़ी मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पहले हर महीने बमुश्किल 200 से 400 रुपये का बिल चुकाते थे, उन्हें अब अचानक 3,000 से लेकर 5,000 रुपये तक के बिल थमाए जा रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि जिन घरों में कूलर, एसी या हीटर जैसे कोई बड़े उपकरण हैं ही नहीं, वहां भी बिजली विभाग हजारों रुपये के बिल भेज रहा है। रोज कमाकर खाने वाले परिवारों के सामने अब इस भारी-भरकम राशि को चुकाने के चक्कर में दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बिजली विभाग की इस कथित मनमानी और तानाशाही रवैये से त्रस्त ग्रामीणों का जीना मुहाल हो चुका है और वे अब इसके खिलाफ लामबंद होने लगे हैं।
सरकारी बिजली से मोहभंग, सौर ऊर्जा की तरफ बढ़ा रुझान
बिजली विभाग के इस अनियंत्रित रवैये और हर महीने आने वाले अनपेक्षित बिलों की मार से परेशान होकर अब धरसींवा की जनता का सरकारी बिजली व्यवस्था से पूरी तरह मोहभंग होने लगा है। इस बेतहाशा लूट से खुद को बचाने के लिए क्षेत्र के लोग अब तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं और उनका रुझान सौर ऊर्जा यानी सोलर पैनल की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों का साफ मानना है कि बिजली विभाग को जीवनभर अपनी गाढ़ी कमाई सौंपने से कहीं बेहतर है कि एक बार थोड़ा खर्च करके घर की छत पर सोलर पैनल लगवा लिया जाए। यही वजह है कि इन दिनों क्षेत्र में सोलर सब्सिडी योजनाओं को लेकर पूछताछ करने और इसे अपनाने की होड़ सी मची हुई है।
सरकार के खिलाफ उबल रहा जन-आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
इस गंभीर और संवेदनशील समस्या को लेकर धरसींवा क्षेत्र की जनता में वर्तमान सरकार के खिलाफ गहरा रोष पनप रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारें एक तरफ चुनाव में मुफ्त और सस्ती बिजली के लुभावने वादे करती हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर स्मार्ट मीटर के जरिए गरीबों की जेब पर सरेआम डाका डाला जा रहा है। एक तरफ अघोषित बिजली कटौती की मार और दूसरी तरफ यह आर्थिक प्रहार, इस दोहरी मार ने लोगों के सब्र का बांध पूरी तरह तोड़ दिया है। आक्रोशित ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि बिजली विभाग ने जल्द ही इन स्मार्ट मीटरों की तकनीकी गड़बड़ियों को दूर कर बढ़े हुए बिलों को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में समूचे क्षेत्र में एक उग्र जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।






