दुर्ग। पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान कथित धोखाधड़ी के मामले में कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं. आरोप है कि जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट ठेका दिलाने का झांसा देकर 17.52 लाख रुपये की ठगी की गई है. मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट ऐश्वर्या दीवान की अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 175(3) के तहत प्रस्तुत आवेदन स्वीकार करते हुए पुलिस को जांच पूरी कर अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. न्यायालय में दायर आवेदन के अनुसार, आवेदक दिनकर विश्वमित्र ने बताया कि उनकी मुलाकात राजेश चौहान से उनके परिचित सरोज कुमार के माध्यम से हुई थी. आरोप लगाया कि राजेश चौहान ने स्वयं को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बताते हुए दावा किया कि उनकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ओडिशा के क्योंझर स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड में आयरन अयस्क और अन्य सामग्री के परिवहन का ठेका मिला है. राजेश चौहान ने इस काम में मोटा मुनाफा का भरोसा दिलाते हुए आवेदक को ट्रक लगाने और कारोबार में साझेदार बनने का प्रस्ताव दिया. विश्वास जीतने के लिए कथित तौर पर वर्क ऑर्डर सहित अन्य दस्तावेज भी दिखाए गए. इन्हीं दस्तावेजों और आश्वासनों पर भरोसा कर आवेदक ने साझेदारी के लिए सहमति दी और निवेश किया. अधिवक्ता सौरभ चौबे ने बताया कि उनके मुवक्किल दिनकर और राजेश के बीच 30 जुलाई 2021 को इकरारनामा हुआ. दिनकर द्वारा पहली बार 2.51 लाख रुपए का भुगतान किया गया. इसके बाद गोविंद टांसपोर्ट कंपनी के खाते में दो किस्तों में कुल 15.01 लाख रुपए भी ट्रांसफर किए. व्यवसायिक लेन-देन के नाम पर धोखाधड़ी कर अवैध रूप से धन अर्जित किए जाने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं. कोर्ट ने पुलिस को विवेचना कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिए हैं. राजेश चौहान ने 90 के दशके में भारतीय टीम के लिए ऑफ स्पिनर के तौर पर 21 टेस्ट और 35 वनडे मैच खेले हैं. टेस्ट मैच में 47 विकेट भी झटके हैं।






