बलौदाबाजार : जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो श्रमिकों की मौत के बाद प्रदेश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं. कांग्रेस नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. साथ ही प्रदेश से हो रहे पलायन और रोजगार के मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरा है.
औद्योगिक इकाईयों के बावजूद पलायन
कांग्रेस विधायक इंद्र कुमार साव ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि कभी छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” और समृद्ध राज्य के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज बड़ी संख्या में उद्योग स्थापित होने के बावजूद स्थानीय युवाओं और मजदूरों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने कहा कि बलौदाबाजार-भाटापारा जिला औद्योगिक इकाइयों से घिरा हुआ है.जब उद्योग स्थापित हुए थे, तब लोगों ने इस उम्मीद के साथ विरोध छोड़ दिया था कि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, लेकिन आज भी मजदूरों को रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है.आतंकी हमले में मजदूर की मौत मामला, कांग्रेस ने एक करोड़ का मांगा मुआवजा, सरकारी नौकरी देने समेत श्रमिक सुरक्षा की मांग
जम्मू कश्मीर आतंकी हमले में मारे गए मजदूर के परिवार को 1 करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग कांग्रेस ने की है.
इंद्र कुमार साव ने कहा कि ग्रामीण रोजगार के अवसर कम होने के कारण श्रमिकों को अपने गांव छोड़कर बाहर जाना पड़ रहा है. गांवों में काम के अभाव के कारण लोग दूर-दराज राज्यों में रोजगार तलाशने के लिए मजबूर हैं और वहां भी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है. कश्मीर में हुए आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के मजदूरों की मौत एक गंभीर विषय है, जिस पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए. सरकार को ऐसी व्यापक योजना बनानी चाहिए जिससे श्रमिकों को अपने ही प्रदेश में सम्मानजनक रोजगार मिल सके.इंद्र कुमार साव ने मृतक मजदूरों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की मांग की.
परिवार का कमाने वाला सदस्य खो जाने के बाद उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. यदि परिवार का कोई सदस्य शिक्षित और रोजगार योग्य है तो उसे सरकारी नौकरी या उपयुक्त रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके. हमले में शामिल आतंकवादियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाए- इंद्र कुमार साव, कांग्रेस विधायक
कांग्रेस ने आतंकी हमले की निंदा की
वरिष्ठ कांग्रेस नेता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो श्रमिक भाई, दीपक कुमार रात्रे और भूपेंद्र कुमार भयना की मौत हुई है, जबकि कई अन्य मजदूर घायल हुए हैं. उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि कांग्रेस विधायक दल के नेता डॉ. चरणदास महंत ने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर घायलों के उपचार, वहां मौजूद श्रमिकों की सुरक्षा और मृतकों के शव छत्तीसगढ़ लाने के लिए आवश्यक पहल की है.
पलायन और रोजगार पर उठाए सवाल
शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि यह घटना केवल एक आतंकी हमला नहीं, बल्कि प्रदेश से हो रहे पलायन की समस्या को भी सामने लाती है.छत्तीसगढ़ में उद्योगों के माध्यम से पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा होता तो प्रदेश के मजदूरों को हजारों किलोमीटर दूर जाकर काम करने की मजबूरी नहीं होती. उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में सीमेंट उद्योग और अन्य बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं तो फिर स्थानीय युवाओं और श्रमिकों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख क्यों करना पड़ रहा है.कांग्रेस के विधायक दल के नेता डॉ. चरणदास महंत ने डीजी इंटेलिजेंस से बात की है. वहां मजदूर रह रहे हैं, उनकी सुरक्षा जो घायल हुए हैं, उनके इलाज और जो मारे गए हैं, उनके शव छत्तीसगढ़ लाए जाने के लिए आवश्यक पहल की है. बड़े दुख की बात है. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई मतभेद नहीं है.हम मांग करते हैं कि इन आतंकवादियों को ढूंढकर मारा जाए. लेकिन छत्तीसगढ़ में जो परिस्थितियां हैं, जिनके कारण यहां के मजदूर अच्छी रोजी के तलाश में पलायन करने के लिए विवश होते हैं, और जहां काम करते हैं वहां उनको सुरक्षा भी नहीं मिल पाती.यह बड़ी दुखद और चिंता की बात है- शैलेश नितिन त्रिवेदी, पूर्व विधायक
सुरक्षा और रोजगार दोनों जरूरी
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार दोनों सरकार की जिम्मेदारी है. यदि प्रदेश में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे तो मजदूरों को दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी कम होगी. फिलहाल कुलगाम हमले में जान गंवाने वाले छत्तीसगढ़ के मजदूरों को लेकर पूरे प्रदेश में शोक का माहौल है. वहीं इस घटना के बाद रोजगार, पलायन और श्रमिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं.






