बिलासपुर में राजस्व पटवारी संघ ने 20 साल से प्रमोशन न मिलने और वेतन विसंगति के विरोध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। पटवारियों ने आरआइ पद पर 100 प्रतिशत पदोन्नति की मांग की है और मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
बिलासपुर (कमलकांत पाटनवार): पदोन्नति का कोई ठिकाना नहीं और वेतन में भी भारी गड़बड़ी हैं, इसी भारी असंतोष के बीच जिले भर के पटवारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। राजस्व पटवारी संघ ने मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर साफ कह दिया है कि यदि राजस्व निरीक्षक पद पर सीधी भर्ती बंद नहीं हुई और वेतन विसंगति नहीं सुधरी, तो पटवारी आंदोलन पर बैठ जाएंगे।राजस्व विभाग में पदोन्नति की व्यवस्था न होने से पटवारियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। स्थिति यह है कि पटवारी के पद पर भर्ती होने वाले कर्मचारी 20-20 साल से एक ही पद पर काम कर रहे हैं और बिना किसी प्रमोशन के सेवानिवृत्त होने को मजबूर हैं। संघ का आरोप है कि वर्ष 2010 बैच के बाद से वेतन निर्धारण में गंभीर गलतियां की गई हैं, जिससे सीनियर और जूनियर कर्मचारियों के वेतन में बड़ा अंतर आ गया है। इससे न केवल हर महीने आर्थिक फटका लग रहा है, बल्कि सर्विस बुक सत्यापन, रिकवरी और भविष्य में मिलने वाली पेंशन पर भी सीधी चपत लग रही है।पटवारियों ने मांग की है कि शासन जल्द प्रशासनिक और तकनीकी गड़बड़ी को सुधारे।बाक्स– 100% पदों पर प्रमोशन का हक, सीधी भर्ती पर लगे रोकपटवारी संघ की सबसे प्रमुख मांग आरआइ भर्ती नीति को लेकर है। संघ का कहना है कि राजस्व निरीक्षक के खाली पदों को पूरी तरह से पटवारियों की पदोन्नति से ही भरा जाना चाहिए। इसके लिए 50 फीसदी पद वरिष्ठता और 50 फीसदी पद विभागीय परीक्षा के आधार पर तय किए जाएं, ताकि योग्य पटवारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिले।ग्रेड पे बढ़ा पर जेब में घट गए पैसे
वेतन विसंगति का खेल ऐसा है कि ग्रेड पे 2200 से बढ़कर 2400 और 2800 होने के बावजूद कई पटवारियों का मूल वेतन बढ़ने के बजाय कम हो गया। नियमतः जहां मूल वेतन 36,400 रुपये होना चाहिए था, वहां महज 35,300 रुपये तय कर दिया गया। इस उल्टे गणित से प्रदेश भर के कर्मचारी बेहद आक्रोशित हैं।वर्जन–20-20 साल की सेवा के बाद भी प्रमोशन न मिलना पटवारियों के साथ सीधा अन्याय है।






