भाटापारा,साइबर ठगी में रकम गंवाने वाले लोगों को अब केवल पुलिस और बैंक की कार्रवाई के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने साइबर क्राइम पीड़ित सहायता एवं ठगी गई रकम की वापसी योजना-2026 तैयार की है। इसके तहत बलौदाबाजार भाटापारा समेत प्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में विशेष साइबर कानूनी सहायता प्रकोष्ठ बनेगा। प्रकोष्ठ शिकायत दर्ज कराने से लेकर बैंक, साइबर पुलिस, न्यायालय में जरूरी कानूनी कार्रवाई तक समन्वय और मदद देगा।
योजना में वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, दिव्यांगजन, वित्तीय ठगी से प्रभावित किशोर व बच्चे, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के मामलों को प्राथमिकता मिलेगी। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त 2026 के निर्देशों के अनुपालन में तैयार की गई है। योजना में सबसे ज्यादा जोर ठगी की सूचना तुरंत देने पर है। पीड़ित को घटना के बाद 1930 हेल्पलाइन, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को जानकारी देने में सहायता मिलेगी। लेन-देन की पहचान संख्या, बैंक खाता, मोबाइल नंबर, अन्य जरूरी विवरण सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।
पुलिस या साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में भी सहयोग मिलेगा। विधिक सेवा प्राधिकरण की आंतरिक कार्यप्रणाली के तहत ठगी की सूचना मिलने के 0 से 2 घंटे के भीतर 1930, बैंक या साइबर पोर्टल पर सूचना देने की प्रक्रिया शुरू होगी। 24 घंटे में प्रारंभिक कानूनी सहायता मिलेगी। 48 घंटे के भीतर साइबर सेल या बैंक से मामले की शुरुआती स्थिति लेने का प्रयास होगा।
सात दिन में रकम रोकने या उसका पता लगाने की कार्रवाई की समीक्षा होगी। 15 दिन में लंबित मामलों की समीक्षा होगी। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि ये समय-सीमाएं केवल आंतरिक समन्वय के लिए हैं। पुलिस या बैंक के लिए कोई बाध्यकारी समय-सीमा तय नहीं होती। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में बनने वाले साइबर कानूनी सहायता प्रकोष्ठ में सचिव या नोडल अधिकारी रहेंगे। पैनल अधिवक्ता, पैरालीगल वॉलंटियर, साइबर पुलिस अधिकारी, बैंक का नोडल अधिकारी, अभिलेख संबंधी कर्मचारी भी शामिल होंगे। प्रकोष्ठ कानूनी सलाह देगा। विभागों के बीच समन्वय करेगा। प्रकरण की प्रगति पर नजर रखेगा।






