एआई (AI) और बकरे की चिता से रची गई मौत की साजिश, मऊ पुलिस ने डेढ़ साल बाद हत्या के आरोपी को जिंदा दबोचा

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और फिल्मी मामला सामने आया है। मऊ पुलिस ने योगेश सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी राजकुमार राजभर उर्फ राजू को जिंदा गिरफ्तार कर लिया है, जिसने डेढ़ साल पहले खुद को मृत साबित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एक बकरे की मदद से अपनी ही मौत की फर्जी साजिश रची थी। आरोपी कानूनी सजा और करोड़ों रुपये की देनदारी से बचने के लिए इस खौफनाक और शातिर योजना पर काम कर रहा था।

बकरे का दाह-संस्कार और एआई (AI) का अनोखा खेल

आरोपी राजकुमार राजभर ने इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए साल 2025 में गाजीपुर के एक श्मशान घाट को चुना। उसने एक बकरे को मारकर इंसानों की तरह उसकी अर्थी सजाई, शवयात्रा निकाली और पूरे रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार कर दिया। इस दौरान उसने चिता पर लेटे बकरे के शव की तस्वीर खींची और बाद में एआई (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर उस तस्वीर पर अपना चेहरा लगा दिया। यह मॉर्फ्ड फोटो इतनी सजीव थी कि पहली नजर में कोई भी इसे फर्जी नहीं कह सकता था।

तेरहवीं का कार्ड और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र

अपनी मौत के नाटक को समाज और कानून की नजर में पूरी तरह सच साबित करने के लिए आरोपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। उसने अपने नाम के बकायदा तेरहवीं के कार्ड छपवाए और सगे-संबंधियों को आमंत्रित किया। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर साठगांठ करके उसने पंचायत से अपना असली दिखने वाला फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट) और अन्य संबंधित सरकारी दस्तावेज भी तैयार करवा लिए।

कोर्ट को गुमराह करने और करोड़ों की धोखाधड़ी का मकसद

राजकुमार राजभर साल 2016 में हुए चर्चित योगेश सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी है, जिसमें अदालत में सुनवाई अंतिम दौर में थी और उसे कड़ी सजा होना तय माना जा रहा था। इसके अलावा, आरोपी ने शेयर बाजार में ट्रेडिंग के नाम पर कई रसूखदार और बड़े लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठे थे। जब निवेशक अपने पैसे वापस मांगने लगे और कोर्ट का शिकंजा कसने लगा, तो उसने इन फर्जी दस्तावेजों को अदालत में पेश कर खुद को कागजों पर मृत घोषित कराने का प्रयास किया ताकि वह हमेशा के लिए कानून की नजरों से ओझल हो सके।

एसओजी और सर्विलांस टीम ने ऐसे किया पर्दाफाश

राजकुमार खुद को मृत दिखाकर पिछले करीब डेढ़ साल से अलग-अलग ठिकानों पर छिपकर रह रहा था। हालांकि, मऊ पुलिस की एसओजी और सर्विलांस टीम को उसकी मौत पर संदेह था, जिसके बाद उसकी तकनीकी और खुफिया निगरानी शुरू की गई। अंततः कड़े इनपुट के आधार पर पुलिस ने रविवार (25 अक्टूबर 2026) की सुबह मऊ के ख्वाजाजहांपुर गांव के पास घेराबंदी करके आरोपी राजकुमार को जीवित अवस्था में धर दबोचा।

नया मुकदमा दर्ज और आगे की कानूनी कार्रवाई

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या के पुराने मुकदमे के साथ-साथ कोर्ट को गुमराह करने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं के तहत एक और नया मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि इस पूरी साजिश में सरकारी अधिकारियों या परिवार के किन-किन लोगों ने उसकी मदद की थी। साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या इस फर्जी मौत के जरिए किसी तरह का बड़ा बीमा क्लेम हड़पने की कोशिश भी की गई थी।

Hot Topics

Related Articles