कवर्धा। शहर के एक निजी आवासीय स्कूल ‘गुरुकुल’ में पढ़ने वाली 10वीं की नाबालिग छात्रा द्वारा बच्चे को जन्म देने का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। आरोपी के खिलाफ बीजापुर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब गुरुकुल पब्लिक स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और हॉस्टल की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आदिवासी विकास परिषद ने एसआईटी जांच की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
सरकारी उत्कर्ष योजना के तहत बीजापुर की एक नाबालिग छात्रा कबीरधाम के निजी स्कूल के हॉस्टल में रहकर 10वीं की पढ़ाई कर रही थी। आरोप है कि छुट्टियों के दौरान गांव में उसके साथ अनाचार हुआ। इसके बाद वह करीब आठ महीने तक स्कूल हॉस्टल में रही। प्राचार्य के अनुसार, 5 फरवरी को तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे घर ले गए और 12 फरवरी को उसने बच्चे को जन्म दिया। मामले में आरोपी के खिलाफ बीजापुर जिले के थाने में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल स्कूल की निगरानी व्यवस्था पर है। आखिर आठ नौ महीने तक हॉस्टल में रह रही छात्रा की गर्भावस्था की जानकारी किसी को कैसे नहीं हुई? क्या वार्डन, महिला स्टाफ या प्रबंधन को इसकी भनक नहीं लगी? और जब छात्रा की तबीयत बिगड़ी तो क्या स्कूल स्तर पर उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया? इन्हीं सवालों के जवाब अब जांच से सामने आने हैं।
इस स्कूल का नाम पहले भी एक नाबालिग छात्रा से जुड़े कथित अनाचार के मामले में सामने आ चुका है। उस समय स्कूल के एक कर्मचारी और तत्कालीन प्राचार्य के खिलाफ भी पुलिस कार्रवाई हुई थी। ऐसे में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, किसी भी संस्थागत लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
इस संबंध में प्राचार्य मनोज राय ने कहा कि यह घटना उनके कार्यकाल से पहले की है। उन्होंने बताया कि छात्रा को परिजन अपने साथ ले गए थे, और बाद में परीक्षा नहीं देने की जानकारी दी गई। स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य सवालों पर उन्होंने तत्कालीन प्राचार्य को ही जवाब देने वाला बताया।
एसआईटी जांच की मांग
आदिवासी विकास परिषद के कामू बैगा ने आरोपी के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिषद का कहना है कि यदि छात्रा लंबे समय तक हॉस्टल में रही, तो निगरानी व्यवस्था की भी जांच होनी चाहिए। संगठन ने एसआईटी गठित करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
फिलहाल, आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। लेकिन अब नजर इस बात पर है कि जांच केवल आरोपी तक सीमित रहती है या स्कूल प्रबंधन की भूमिका और हॉस्टल की निगरानी व्यवस्था की भी निष्पक्ष जांच होती है। क्योंकि स्कूल सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी भी है।






