चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने बढ़ाई किसानों की चिंता, बारिश से खेतों में गिरी धान की पकी फसल; अधपकी फसल पर कीटों का खतरा

बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है। बलौदा बाजार, भाटापारा, सिमगा, कसडोल और पलारी सहित जिले के सभी विकासखंडों में बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में खरीफ सीजन की धान की फसल पककर तैयार है, लेकिन बेमौसम बारिश से कई जगह पकी फसल जमीन पर गिर गई है। वहीं, खेतों में पानी भरने से कटाई प्रभावित होने की आशंका है।

बारिश से जमीन पर गिरी धान की पकी फसल

खेतों में धान की फसल पककर तैयार है और किसान कटाई की तैयारी में जुटे हुए हैं। इसी बीच लगातार बारिश ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई स्थानों पर धान की पकी फसल जमीन पर गिर गई है। खेतों में नमी और जलभराव के कारण कटाई में देरी होने की आशंका भी बढ़ गई है। इससे किसानों को अपनी महीनों की मेहनत पर पानी फिरने और आर्थिक नुकसान होने का डर सता रहा है।

धान के दाने बदरंग होने का खतरा

लगातार बारिश का असर केवल फसल की कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे धान की गुणवत्ता और उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। खेतों में गिरी धान की बालियों में लंबे समय तक नमी बनी रहने से दाने बदरंग हो सकते हैं। वहीं, अधिक नमी के कारण दानों में अंकुरण होने का खतरा भी बढ़ सकता है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ, तो किसानों को उपज की गुणवत्ता में गिरावट के साथ आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अधपकी फसल पर कीट प्रकोप का खतरा

बारिश ने उन किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है, जिनकी धान की फसल अभी पूरी तरह नहीं पक पाई है। खेतों में धान की बालियां निकल चुकी हैं, लेकिन फसल के पूरी तरह तैयार होने में अभी समय है। लगातार बारिश और बादलों के कारण फसल में कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ने की आशंका है। इससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में किसानों के सामने फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

समर्थन मूल्य पर धान बेचने में आ सकती है परेशानी

बारिश के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित होने पर किसानों को उपज बेचने के दौरान भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दानों के बदरंग होने और अंकुरण से उपज की गुणवत्ता में गिरावट आने की आशंका है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह मानें किसान

कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान मौसम और फसल की स्थिति को ध्यान में रखकर ही कटाई का निर्णय लें। खेतों में पानी जमा होने पर उसकी निकासी की उचित व्यवस्था करें। गिरी हुई फसल पर विशेष नजर रखें और मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आगे की कार्रवाई करें।

बेमौसम बारिश ने बलौदा बाजार जिले के धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पकी फसल के गिरने, धान के दाने बदरंग होने और अधपकी फसल में कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ने से किसानों को नुकसान की आशंका सता रही है। अब किसानों की निगाहें मौसम साफ होने पर टिकी हैं।

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