चक्रवाती तूफान से धान की फसल को नुकसान, सर्वे के बाद मुआवजे पर होगा फैसला

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा का ऐलान, बारिश थमने के बाद सरकार कराएगी फसल क्षति का आकलन

रायपुर, 29 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है। खराब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में धान की फसल को नुकसान पहुंचने की खबरों के बीच राज्य के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने प्रभावित किसानों को राहत देने के संबंध में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बारिश थमने के बाद राज्य सरकार फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराएगी। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

बारिश और तेज हवाओं से फसलों को नुकसान

चक्रवाती तूफान के प्रभाव से राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। जानकारी के अनुसार, तूफान ने सुबह बस्तर क्षेत्र में प्रवेश किया और कोंडागांव तथा गरियाबंद की ओर बढ़ते हुए रायपुर की तरफ आगे बढ़ने का अनुमान जताया गया। मौसम विभाग के अनुसार, आगे बढ़ने के साथ तूफान के कमजोर होने की संभावना है।

तेज हवाओं और बारिश के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। विशेषकर पककर तैयार हो चुकी धान की फसल के गिरने और खेतों में पानी भरने से किसानों को नुकसान हो सकता है। प्रशासन ने मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्कता बरतने की अपील की है।

सर्वे के आधार पर तय होगी मुआवजे की राशि

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि बारिश रुकने के बाद फसल क्षति का सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के संबंध में फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, वे बीमा के प्रावधानों के तहत सहायता प्राप्त करने के पात्र हो सकते हैं।

मंत्री के अनुसार, खाद-बीज की खरीदी के दौरान भी बीमा से संबंधित व्यवस्था लागू हो सकती है। ऐसे में प्रभावित किसानों को अपने बीमा की स्थिति और पात्रता की जानकारी लेकर नियमानुसार दावा प्रस्तुत करना चाहिए।

किसानों को कृषि विभाग की सलाह

मौसम में बदलाव और आगामी दिनों में बारिश की संभावना को देखते हुए कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, धान, मक्का और तिलहन सहित खरीफ फसलों के पकने की अवस्था में पहुंचने पर उनकी शीघ्र कटाई कर सुरक्षित स्थानों पर भंडारण किया जाए।

जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसल को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रखें। खेतों में खड़ी फसलों की नियमित निगरानी करें और बारिश के कारण जलभराव की स्थिति न बनने दें। इसके लिए खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। तेज हवाओं से फसलों को गिरने से बचाने के लिए भी आवश्यक उपाय करने को कहा गया है।

मौसम साफ होने के बाद करें रबी फसलों की बुआई

कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को फिलहाल गेहूं, चना और मसूर जैसी रबी फसलों की बुआई स्थगित रखने की सलाह दी है। मौसम साफ होने के बाद नवंबर के प्रथम सप्ताह में रबी फसलों की बुआई शुरू करने का सुझाव दिया गया है।

फिलहाल किसानों की नजरें मौसम के अगले रुख और फसल क्षति के सर्वे पर टिकी हैं। राज्य सरकार द्वारा सर्वे कराए जाने के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और प्रभावित किसानों को राहत देने के संबंध में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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