छत्तीसगढ़ में भी गरमाया बिना ‘TET’ पदोन्नति का मुद्दा: हिमाचल हाई कोर्ट के फैसले के बाद बिना टेट पास प्रधानपाठकों की धड़कनें तेज

रायपुर।हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास किए जेबीटी शिक्षकों को हेड टीचर बनाने के मामले में सरकार और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी करने के बाद अब इसका असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ में पिछले दिनों प्राथमिक शाला के प्रधानपाठक (Headmaster) के पदों पर हुई बड़े पैमाने पर पदोन्नति अब कानूनी सवालों के घेरे में आती दिख रही है। राज्य के टेट पास युवाओं और शिक्षकों के बीच इस फैसले को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ में हुए प्रमोशन को चुनौती देने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।सुप्रीम कोर्ट का आदेश बना आधारउल्लेखनीय है कि हिमाचल हाई कोर्ट में दायर याचिका में वकीलों ने देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के उस ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार के प्रमोशन या सीधी भर्ती के लिए ‘TET’ (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। जिन शिक्षकों ने यह परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें पदोन्नत नहीं किया जा सकता। छत्तीसगढ़ में भी शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों को प्रधानपाठक के पदों पर प्रमोट किया गया है, जिनमें से एक बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है जिन्होंने टेट परीक्षा पास नहीं की है।



  • छत्तीसगढ़ में भी रद्द हो सकते हैं प्रमोशन के आदेश?


कानूनी जानकारों का मानना है कि हिमाचल हाई कोर्ट की टिप्पणी छत्तीसगढ़ के मामले में भी एक बड़ा नजीर (Precedent) बन सकती है।

हिमाचल हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिना टेट पास प्रमोट हुए शिक्षक भविष्य में किसी भी प्रकार के विशेष अधिकार या वैधानिक लाभ का दावा नहीं कर सकेंगे और यदि अंतिम फैसला प्रमोशन के खिलाफ आता है, तो सभी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त माने जाएंगे।छत्तीसगढ़ में इस आधार पर यदि मामला कोर्ट पहुंचता है, तो स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राज्य के कई जिलों में वरिष्ठता के आधार पर बिना टेट वाले शिक्षकों को प्रधानपाठक बना दिया गया है, जिससे टेट पास योग्य जूनियर शिक्षकों में लंबे समय से असंतोष व्याप्त है।

टेट पास शिक्षकों की बढ़ी उम्मीदें

छत्तीसगढ़ के टेट उत्तीर्ण शिक्षक संघों और अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हर राज्य में कड़ाई से पालन होना चाहिए।

हिमाचल हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब छत्तीसगढ़ के पीड़ित शिक्षक भी एकजुट हो रहे हैं। उनका कहना है कि वे जल्द ही छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (बिलासपुर) में याचिका दायर कर बिना टेट पास प्रमोट हुए प्रधानपाठकों के आदेश को निरस्त करने और केवल टेट पास योग्य शिक्षकों को ही इस पद पर बैठाने की मांग करेंगे।

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