रायपुर: छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक के साथ ही ग्रामीण और वनांचल इलाकों में सांप काटने (सर्पदंश) के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। राज्य के जशपुर जिले को ‘नागलोक’ के नाम से भी जाना जाता है, जहां इस मौसम में सांपों की सक्रियता काफी बढ़ जाती है। सर्प विशेषज्ञों के अनुसार छत्तीसगढ़ में सांपों की लगभग 19 प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं। राहत की बात यह है कि इनमें से अधिकांश प्रजातियां विषहीन (बिना जहर वाली) होती हैं, लेकिन 4 प्रजातियां ऐसी हैं जो बेहद जहरीली और जानलेवा हैं।अक्सर लोग सांप काटने पर अस्पताल जाने के बजाय अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में समय गंवा देते हैं, जो मौत का मुख्य कारण बनता है।
यह समाचार आपको छत्तीसगढ़ के प्रमुख सांपों की पहचान और सर्पदंश की स्थिति में उठाए जाने वाले जरूरी कदमों के प्रति जागरूक करने के लिए तैयार किया गया है।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख जहरीले सांप और उनकी पहचानछत्तीसगढ़ के जंगलों, खेतों और रिहायशी इलाकों में पाए जाने वाले ‘बिग फोर’ (चार सबसे खतरनाक जहरीले सांप) की पहचान इस प्रकार है:
पहचान: यह सांप खतरा महसूस होने पर अपना फन फैलाता है। इसके फन के पीछे अंग्रेजी के ‘O’ या चश्मे जैसा (Spectacle mark) निशान बना होता है। यह भूरे, काले या पीले रंग का हो सकता है।
जहर का प्रकार: इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक (Neurotoxic) होता है, जो सीधे इंसान के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर हमला करता है।
2. कॉमन करैत (चित्तीदार सांप)पहचान: यह चमकीले काले या गहरे नीले रंग का होता है, जिस पर पूरी पीठ पर सफेद रंग की दोहरी धारियां (बैंड्स) बनी होती हैं। यह सांप अक्सर रात के समय सक्रिय होता है और जमीन पर सो रहे लोगों को चुपके से काट लेता है, जिससे नींद में ही मौत हो जाती है।

जहर का प्रकार: इसका जहर कोबरा से भी कई गुना अधिक खतरनाक और न्यूरोटॉक्सिक होता है।
3. रसेल वाइपर (घोणस/कोरी)पहचान: यह भारी और मोटे शरीर का सांप होता है। इसकी त्वचा पर भूरे या पीले रंग के गोल-गोल छल्ले (Chain-like pattern) बने होते हैं। जब इसे खतरा महसूस होता है, तो यह कुकर की सीटी जैसी तेज फुफकार (Hissing sound) पैदा करता है।
जहर का प्रकार: इसका जहर हीमोटॉक्सिक (Haemotoxic) होता है, जो खून को जमा देता है और शरीर के अंगों से ब्लीडिंग शुरू कर देता है।
4. सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसा)
पहचान: यह आकार में काफी छोटा लेकिन बेहद आक्रामक सांप है। इसकी पीठ पर तीर या कली जैसा निशान होता है। खतरा होने पर यह अपने शरीर के स्केल्स (शल्कों) को आपस में रगड़कर आरी चलने जैसी आवाज निकालता है।
सांप काटने पर ‘क्या करें’
(तुरंत अपनाएं ये प्राथमिक उपचार)यदि किसी व्यक्ति को सांप काट लेता है, तो बिना घबराए नीचे दिए गए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं:
- मरीज को शांत रखें: घबराहट के कारण दिल की धड़कन तेज होती है, जिससे जहर शरीर में तेजी से फैलता है। मरीज को भरोसा दें कि वह ठीक हो जाएगा।
- अंग को स्थिर रखें: प्रभावित हिस्से (हाथ या पैर) को बिल्कुल न हिलाएं। हिलने-डुलने से जहर मांसपेशियों के जरिए तेजी से आगे बढ़ता है। हाथ-पैर को सहारा देने के लिए लकड़ी की पट्टी (Splint) का सहारा ले सकते हैं।
- गहने और तंग कपड़े उतारें: सांप काटने वाली जगह पर सूजन आ सकती है। इसलिए तुरंत ही मरीज की अंगूठी, घड़ी, चूड़ी, पायल या तंग कपड़े उतार दें।
- घाव को साफ करें: काटने वाले स्थान को साफ पानी और साबुन से हल्के हाथों से धोएं।
- तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाएं: मरीज को बिना समय गंवाए नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) या जिला अस्पताल पहुंचाएं। एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom – ASV) ही इसका एकमात्र इलाज है, जो सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है।







