जंतर-मंतर आंदोलन के लिए निकले सीतापुर के युवक की सड़क हादसे में मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

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जियाउल खान ,सीतापुर/सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र के युवक दीपक सिंह कुसरो की दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रस्तावित छात्र आंदोलन में शामिल होने के दौरान सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। परिवार ने अपना सबसे जिम्मेदार सदस्य खो दिया है और अब घर में मातम पसरा हुआ है।

बताया जा रहा है कि दीपक सिंह कुसरो 17 जुलाई की रात अपने मित्र सूरजभान सिंह (निवासी बटाइकेला) के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर के लिए रवाना हुए थे। उनका उद्देश्य कथित नीट पेपर लीक मामले के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करना था। रास्ते में हुई एक सड़क दुर्घटना में दीपक की मौत हो गई, जबकि परिवार को बाद में अस्पताल से फोन के माध्यम से घटना की जानकारी मिली।

दीपक के निधन के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पिता लंबे समय से अस्वस्थ बताए जाते हैं, वहीं बेटे की मौत के सदमे में उनकी मां की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दीपक अपने पीछे एक भाई और दो बहनों को छोड़ गए हैं।

परिजनों के अनुसार दीपक बचपन से ही मेहनती और जिम्मेदार थे। उन्होंने घर की आर्थिक जिम्मेदारियां अपने कंधों पर उठा रखी थीं। वे एक किराना दुकान चलाते थे और हाल ही में एक ट्रैक्टर भी खरीदा था, जिससे काम कर परिवार की मदद करते थे। उन्होंने बारहवीं तक शिक्षा प्राप्त की थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे।

परिवार का कहना है कि दिल्ली जाने से पहले दीपक ने अपने चाचा से केवल रेनकोट मांगा था और यह कहकर घर से निकले थे कि वे थोड़ी दूर जा रहे हैं। उन्हें आशंका थी कि यदि वास्तविक उद्देश्य बता देंगे तो परिवार उन्हें जाने से रोक देगा। उनके पिता उस समय सो रहे थे, इसलिए उनसे अंतिम मुलाकात भी नहीं हो सकी।

दुर्घटना के बाद ग्राम पंचायत सचिव के सहयोग से दीपक का पार्थिव शरीर उनके गांव लाया गया, जहां परिजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।

इस घटना के बाद परिवार ने दुख जताते हुए कहा कि अब तक कोई जनप्रतिनिधि, विधायक या अन्य जिम्मेदार अधिकारी उनके घर सांत्वना देने नहीं पहुंचा। स्थानीय स्तर पर इस बात को लेकर भी चर्चा है कि ऐसे दुखद समय में परिवार को सामाजिक और प्रशासनिक सहयोग मिलना चाहिए।

दीपक की असामयिक मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर युवाओं के भविष्य और उनकी आवाज उठाने की बात होती है, वहीं दूसरी ओर एक युवा अपने सपनों और जिम्मेदारियों के साथ दुनिया से विदा हो गया। अब परिवार के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि उनकी अधूरी जिम्मेदारियों और सपनों को कौन पूरा करेगा।

फिलहाल पूरा परिवार गहरे सदमे में है और गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।

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