टीईटी के बिना अब शिक्षकों का नहीं होगा प्रमोशन !

रायपुर।छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में अब प्राथमिक प्रधान पाठक और अन्य शिक्षक पदों पर प्रमोशन पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नए नियम के लागू होते ही प्रदेश के शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों में हड़कंप मच गया है।हाल ही में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बलौदाबाजार-भाटापारा और बस्तर जेडी कार्यालय द्वारा जारी कड़े निर्देशों के अनुसार, जो सहायक शिक्षक टीईटी (TET) पास नहीं हैं, उन्हें प्रमोशन सूची से बाहर रखा जाएगा। यानी अब पदोन्नति के लिए केवल वर्षों का अनुभव या सेवा अवधि काफी नहीं होगी।

क्या है इस फैसले का कानूनी आधार?

शिक्षा विभाग ने अपने आदेशों में तीन प्रमुख कानूनी आधारों और अदालती फैसलों का हवाला दिया है:

RTE Act (धारा 23): इसके तहत कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा तय न्यूनतम योग्यता होना जरूरी है।

NCTE की अधिसूचना: 23 अगस्त 2010 के नियमों के मुताबिक प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्तर पर अध्यापन के लिए टीईटी (TET) अनिवार्य योग्यता है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने हालिया आदेशों में साफ किया है कि निर्धारित योग्यता पूरी न करने वाले इन-सर्विस (सेवारत) शिक्षक भी पदोन्नति के पात्र नहीं माने जाएंगे।

हजारों शिक्षकों के प्रमोशन पर लटकी तलवार छत्तीसगढ़ में कई ऐसे सहायक शिक्षक हैं जो पिछले 15-20 वर्षों से सेवा में हैं, लेकिन उनके पास टीईटी (TET) की डिग्री नहीं है। नए आदेश के बाद बस्तर संभाग में मार्च में जारी हुए प्रमोशन धारकों से भी तत्काल टीईटी सर्टिफिकेट की हार्ड और सॉफ्ट कॉपी मांगी गई है। सर्टिफिकेट न होने की स्थिति में उनका प्रमोशन निरस्त किया जा सकता है।

शिक्षक संगठनों में तीव्र आक्रोश

सरकार के इस फैसले से राज्य के शिक्षक संगठनों में तीव्र असंतोष है। शिक्षकों का तर्क है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, तब टीईटी जैसा कोई नियम नहीं था। ऐसे में इतने वर्षों के जमीनी अनुभव को दरकिनार कर केवल एक परीक्षा को आधार बनाना न्यायसंगत नहीं है। कई शिक्षक संगठन इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने और आंदोलन करने की रणनीति बना रहे हैं।

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