“टैंकर नहीं, टोटी फूट गई”: मुंगेली में 75% पानी रास्ते में बहा, जनता प्यासे… नगर पालिका मौन!

मुंगेली(रिपोर्टर-संदीप यादव) | सरकार कहती है “जल ही जीवन है”। और मुंगेली नगर पालिका उसे *सड़कों पर बहाकर साबित कर रही है*। पेयजल संकट से जूझ रहे शहर में जो पानी टैंकर से आना चाहिए वो टैंकर के रिसाव से पहले ही नालियों में जा रहा है।

स्थिति ये है कि टैंकर से 1000 लीटर पानी निकलता हैजनता तक 250 लीटर ही पहुंचता है। बाकी 750 लीटर रास्ते की धूल बुझाता है।*

“सरकारी पानी, सरकारी बर्बादी

नगर पालिका के टैंकरों की हालत देखकर लग रहा है मानो ये *स्क्रैप के लिए भेजे जाने वाले डब्बे* हैं। जंग लगे, नीचे से लीक करते टैंकर रोज हजारों लीटर पानी लेकर निकलते हैं और पूरे शहर में *”पानी की लकीर”* बनाते चलते हैं।

इधर कॉलोनियों में महिलाएं 2-2 घंटे टैंकर का इंतजार करती हैं। उधर टैंकर आधा खाली आकर “पानी खत्म” कहकर लौट जाता है।

ये लापरवाही नहीं तो क्या है? *जनता के टैक्स का पैसा, सरकार का डीजल, और कीमती पानी… तीनों की बर्बादी।*

 *सवाल: कुर्सी पर कौन सो रहा है?*

सबसे शर्मनाक बात ये है कि *ये समस्या नई नहीं है। महीनों से टैंकर लीक कर रहे हैं।*

फिर भी:

1. *मरम्मत नहीं हुई*

2. *नए टैंकर नहीं खरीदे गए*

3. *किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई*

आखिर क्यों? *क्या नगर पालिका का खजाना खाली है? या फिर खजाना है पर उसे “जरूरी कामों” के लिए बचाकर रखा गया है?*

मुंगेली का नाम लेने वाले बड़े-बड़े नेता जब मंच से “विकास” की बात करते हैं, तब क्या उन्हें ये लीक करते टैंकर नहीं दिखते?


*जनता का गुस्सा: “जवाब दो”


लोग अब पूछ रहे हैं _”हम पानी के बिल का टैक्स देते हैं। तो पानी हमें क्यों नहीं मिल रहा? जो पानी रास्ते में बह रहा है उसका जिम्मेदार कौन है?”_


नगर पालिका प्रशासन से *जनता की सीधी मांग* है:


1. *48 घंटे में सभी जर्जर टैंकर सीज करो*

2. *नए टैंकर उतारो या प्राइवेट टैंकर हायर करो*

3. *बर्बादी के लिए जवाबदेही तय करो*

*अंतिम चेतावनी*

पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे मुंगेली वासियों का सब्र अब टूट रहा है। यदि नगर पालिका ने तुरंत संज्ञान नहीं लिया तो *जनता सड़क पर उतरकर हिसाब मांगेगी।*

क्योंकि *प्यासे को पानी नहीं और पानी को इज्जत नहीं* – ये कैसा विकास है?

 

 

 

 

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