बलौदाबाजार,जमीन के सौदे और निवेश में मोटा मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर करीब 10 करोड़ रुपए की कथित ठगी करने का आरोपी अब्दुल हैदर छह महीने बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। दर्जनभर से अधिक लोगों से रकम लेने और परिवार सहित फरार होने के आरोपों के बीच अब पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे हैं। ठगी के शिकार लोग छह महीने से थानों के चक्कर काट रहे हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि कई शिकायतें देने के बावजूद पुलिस ने अब तक केवल नगर पालिका के पार्षद और नेता प्रतिपक्ष सलमान शेख की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। बाकी शिकायतों पर मामला दर्ज नहीं होने से पीड़ितों में नाराजगी है। उन्होंने कलेक्टर से भी शिकायत कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की कथित ठगी का आरोपी आखिर कहां है और उसे पकड़ने में पुलिस को अब तक सफलता क्यों नहीं मिली? पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी को जानबूझकर बचाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायतों की जानकारी आरोपी तक पहुंचने की आशंका पीड़ितों का कहना है कि पुलिस को आरोपी की तलाश में तेजी दिखानी चाहिए, लेकिन अब तक उन्हें कार्रवाई का ठोस नतीजा नहीं मिला है। मामले को लेकर संदेह इसलिए भी गहरा रहा है क्योंकि शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, फरार आरोपी अब्दुल हैदर के परिजन शहर में स्थित अपनी संपत्तियों के सौदे के सिलसिले में अब भी आते-जाते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में पीड़ितों का सवाल है कि जब संपत्तियों से जुड़े लेनदेन की गतिविधियां जारी होने की बात सामने आ रही है, तो आरोपी तक पहुंचने के लिए पुलिस क्या कदम उठा रही है? शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि उनके द्वारा की जा रही शिकायतों और मामले से जुड़ी जानकारी आरोपी तक पहुंच रही है। इसी दिन जमीन के सौदे में रकम देने वाले मुस्ताक चौहान को भी बड़ा झटका लगा। उनके मुताबिक, जमीन की खरीद के लिए उन्होंने तीन दिन पहले ही 10 लाख रुपये का भुगतान किया था। आरोपी ने 6 जुलाई को दोपहर तीन बजे रजिस्ट्री कार्यालय में रजिस्ट्री कराने के लिए बुलाया था। मुस्ताक इंतजार करते रहे, लेकिन आरोपी वहां नहीं पहुंचा। घंटों इंतजार के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला, तो संदेह गहराने लगा। पीड़ित के अनुसार, उसी दिन शाम 4 बजकर 33 मिनट से आरोपी के तीनों मोबाइल नंबर बंद आने लगे। इसके बाद से उसका कोई ठोस सुराग नहीं मिलने की बात कही जा रही है। पीड़ितों का मानना है कि बैंक से रकम निकालने, कार लेकर बिलासपुर जाने और रजिस्ट्री के लिए नहीं पहुंचने की घटनाओं को एक साथ जोड़कर जांच की जाए, तो फरारी से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। पीड़ितों के मुताबिक, आरोपी के फरार होने की कहानी 6 जुलाई की घटनाओं से जुड़ी है। आरोप है कि उस दिन सुबह वह ठगी के शिकार एक व्यक्ति की मोटरसाइकिल लेकर शहर के बैंकों में पहुंचा और अपने खातों से रकम निकाली। इसके बाद दोपहर में शहर के ही एक युवक की कार लेकर बिलासपुर रेलवे स्टेशन गया। वहां उसका भतीजा कपड़ों से भरे दो बैग लेकर पहले से मौजूद था। आरोप है कि आरोपी कार की चाबी उसे सौंपने के बाद वहां से रवाना हो गया। पीड़ितों का कहना है कि उस दिन की गतिविधियों और संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज की समय रहते जांच की जाती, तो आरोपी की आवाजाही और उसके फरार होने के तरीके से जुड़े अहम सुराग मिल सकते थे। अब सवाल यह है कि इन घटनाओं के संबंध में पुलिस ने कितनी जांच की। पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी अब्दुल हैदर अपना हुलिया बदल-बदलकर अलग-अलग शहरों में छिपता फिर रहा है। इसी वजह से उसकी तलाश चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, उसके मौजूदा ठिकाने या हुलिया बदलकर छिपने के संबंध में कोई ठोस सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है। इस पूरे मामले में सिटी कोतवाली थाना प्रभारी लखेश केवट का कहना है कि पुलिस ने अपने स्तर पर कार्रवाई की है और उसके आधार पर आरोपी को बहुत जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन कई पीड़ितों की शिकायतों के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने के आरोपों ने मामले को चर्चा में ला दिया है।







