शक्कर के दाम भी बढ़े, थोक में 52 और चिल्हर में 60 रुपए किलो तक पहुंची कीमत
छोटे परिवार का मासिक राशन बजट 4 हजार से बढ़कर 5 हजार रुपए के पार, आम आदमी की जेब पर बढ़ा बोझ
भाटापारा। त्योहारी सीजन के बीच खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम आदमी का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। बीते दो माह में चावल, अरहर दाल और शक्कर के दाम में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चावल की विभिन्न किस्मों के दाम 20 से 30 रुपए प्रति किलो तक बढ़ गए हैं, वहीं अरहर दाल की कीमत में 50 रुपए प्रति किलो का इजाफा हुआ है। शक्कर के दाम भी दोबारा बढ़ने लगे हैं। खाद्य पदार्थों की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि जिस छोटे परिवार का महीनेभर का राशन पहले लगभग 4 हजार रुपए में आ जाता था, अब उसी के लिए 5 हजार रुपए से अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। एक तरफ घरेलू जरूरतों का खर्च बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ आमदनी में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं होने से परिवारों के लिए बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।
चावल की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
धान उत्पादन के लिए पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ के भाटापारा में चावल की बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। खासकर पतले चावल की विभिन्न किस्मों के दाम में तेजी आई है। कारोबारियों के अनुसार, मध्यप्रदेश के सिवनी का काली मूंछ चावल उपभोक्ताओं के बीच काफी पसंद किया जाता है। इसकी थोक कीमत दो माह पहले 50 रुपए प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 70 रुपए हो गई है। चिल्हर बाजार में इसकी कीमत 75 से 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।
इसी तरह एचएमटी चावल की थोक कीमत पहले 45 रुपए प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 65 से 68 रुपए हो गई है। चिल्हर में इसके दाम लगभग 75 रुपए प्रति किलो हैं। अब्बा हुजूर चावल की कीमत में भी बड़ी वृद्धि हुई है। इसकी थोक कीमत 60 रुपए से बढ़कर 90 रुपए प्रति किलो हो गई है, जबकि चिल्हर बाजार में यह 100 रुपए किलो बिक रहा है।
जय श्रीराम चावल की कीमत में भी 20 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। इसकी थोक कीमत पहले 50 से 55 रुपए थी, जो अब बढ़कर 70 से 75 रुपए हो गई है। चिल्हर में इसके दाम 75 से 80 रुपए प्रति किलो हैं। वहीं जवां फूल चावल की थोक कीमत 90 रुपए से बढ़कर 120 रुपए प्रति किलो हो गई है। चिल्हर बाजार में इसकी कीमत 130 रुपए तक पहुंच गई है।
अरहर दाल 160 रुपए किलो, चना और उड़द भी महंगी
दालों की कीमतों में भी तेजी का असर साफ दिखाई दे रहा है। सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली अरहर यानी रहर दाल के दाम में दो माह के भीतर 50 रुपए प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। अच्छी गुणवत्ता वाली अरहर दाल पहले चिल्हर बाजार में 100 से 110 रुपए प्रति किलो मिल रही थी, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर 160 रुपए हो गई है। थोक बाजार में भी इसके दाम लगभग 150 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं।
चना दाल की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले 70 से 80 रुपए प्रति किलो मिलने वाली चना दाल अब थोक में 100 रुपए और चिल्हर में 110 रुपए प्रति किलो बिक रही है। उड़द दाल की थोक कीमत 140 रुपए और चिल्हर कीमत 150 रुपए प्रति किलो हो गई है। मूंग दाल थोक में 120 रुपए और चिल्हर में 130 रुपए प्रति किलो बिक रही है। वहीं देशी चने की कीमत थोक में 85 रुपए और चिल्हर में 90 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।
शक्कर के दाम में भी फिर उछाल
शक्कर की कीमतों में भी एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। पहले शक्कर के दाम 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुके थे। इसके बाद कीमतों में गिरावट आई और इस माह की शुरुआत में थोक बाजार में शक्कर 46 से 47 रुपए तथा चिल्हर बाजार में लगभग 50 रुपए प्रति किलो मिलने लगी थी। अब इसके दाम फिर बढ़कर थोक में 51 से 52 रुपए और चिल्हर में 55 से 60 रुपए प्रति किलो हो गए हैं।
शक्कर की कीमतों में दोबारा हुई इस वृद्धि से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ चाय-नाश्ते और मिठाई से जुड़े छोटे कारोबारियों का खर्च भी बढ़ने की आशंका है।
हर महीने बिगड़ रहा परिवारों का बजट
खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से आम परिवारों के लिए महीने का खर्च संभालना चुनौती बनता जा रहा है। चावल, दाल और शक्कर रोजमर्रा के भोजन की प्रमुख जरूरतें हैं। ऐसे में इनकी कीमतें बढ़ने का असर सीधे रसोई के बजट पर पड़ता है।
उपभोक्ताओं के सामने समस्या यह है कि एक खाद्य पदार्थ की कीमत में हुई बढ़ोतरी का असर संभालने से पहले ही दूसरे सामान के दाम बढ़ जाते हैं। त्योहारी सीजन में अतिरिक्त खर्च के बीच राशन की बढ़ती कीमतों ने परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है।
कालाबाजारी पर नजर रखने की जरूरत
त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी के बीच जमाखोरी और कालाबाजारी पर निगरानी की जरूरत भी महसूस की जा रही है। हालांकि, कीमतों में वृद्धि के पीछे वास्तविक कारणों का पता संबंधित बाजार की जांच और कारोबारियों से जानकारी लेकर ही लगाया जा सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से बाजार की नियमित निगरानी और शिकायतों पर कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के बीच अब आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने का इंतजार है।







