पूर्व एल्डरमैन मुकेश साहू ने उठाए सवाल, कहा- समाज की भावनाओं का सम्मान करे शासन-प्रशासन एक वर्ष से अधिक समय से संचालित है प्रीमियम लिकर शॉप, साहू समाज सहित विभिन्न संगठनों ने जताया था विरोध; दुकान हटाने की मांग फिर उठी
भाटापारा। शहर के दानवीर भामाशाह चौक पर संचालित प्रीमियम लिकर शॉप को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। साहू समाज सहित विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के विरोध के बावजूद शराब दुकान का संचालन जारी रहने पर समाज के लोगों ने नाराजगी जताई है। नगर पालिका परिषद भाटापारा के पूर्व एल्डरमैन मुकेश साहू ने इस मामले में शासन-प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए समाज की भावनाओं का सम्मान करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
मुकेश साहू का कहना है कि दानवीर भामाशाह चौक पर प्रीमियम लिकर शॉप खुले हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान साहू समाज सहित विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने दुकान के संचालन का विरोध किया, लेकिन इसके बावजूद दुकान संचालित हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समाज की आपत्तियां लगातार सामने रखी गईं, तो उन पर गंभीरता से विचार क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि दानवीर भामाशाह केवल साहू समाज के आराध्य और गौरव नहीं हैं, बल्कि देशभर में त्याग, दान और स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में सम्मानित हैं। ऐसे महापुरुष के नाम से जुड़े चौक पर शराब दुकान का संचालन समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय है। इस मामले में समाज की आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
आखिर समाज की भावनाओं पर ध्यान क्यों नहीं?
पूर्व एल्डरमैन मुकेश साहू ने सवाल उठाया कि साहू समाज सहित विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध दर्ज कराने के बाद भी प्रीमियम लिकर शॉप का संचालन जारी क्यों है? उन्होंने कहा कि समाज की भावनाओं और आपत्तियों को नजरअंदाज किए जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले पर गंभीरता से विचार किया जाए और समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए।
लोकतांत्रिक तरीके से विरोध की चेतावनी
मुकेश साहू ने कहा कि समाज की भावनाओं की अनदेखी किए जाने पर समाज अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए शांतिपूर्ण विरोध करेगा। उन्होंने शासन-प्रशासन से मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए उचित कार्रवाई करने की अपील की।
मुकेश साहू, पूर्व एल्डरमैन, नगर पालिका परिषद भाटापारा ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग समाज की भावनाओं के सम्मान और इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर गंभीर पहल से जुड़ी है।







