अंबिकापुर । सरगुजा जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट) कमलेश जगदल्ला की अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी अनुशंसा की है कि पीड़िता को शासन की योजना के तहत 5 लाख रुपये का प्रतिकर दिया जाए। इस मामले में दुष्कर्म के कारण नाबालिग गर्भवती हो गई थी और उसने एक बच्चे को जन्म दिया था।
2022 में हुआ था अपहरण और दुष्कर्म
विशेष लोक अभियोजक विद्याभूषण श्रीवास्तव ने बताया कि सरगुजा जिले के कमलेश्वरपुर थाना क्षेत्र निवासी विमल खाखा (19) ने 20 जुलाई 2022 से 26 जुलाई 2022 के बीच 15 वर्ष 9 माह 25 दिन की नाबालिग को अपने कब्जे में रखकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर दुष्कर्म किया था।
परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने नाबालिग को आरोपी के कब्जे से बरामद किया और आरोपी के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया
पुलिस द्वारा चालान पेश किए जाने के बाद मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में हुई। अदालत ने गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत ने कहा- नरमी से जाएगा गलत संदेश
अपने फैसले में अदालत ने कहा कि दंड तय करते समय केवल आरोपी की उम्र या पारिवारिक परिस्थितियों पर विचार नहीं किया जा सकता, बल्कि अपराध की प्रकृति, पीड़िता को हुई शारीरिक और मानसिक पीड़ा तथा समाज पर उसके प्रभाव को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
अदालत ने टिप्पणी की कि नाबालिग पीड़िता के गर्भवती होकर बच्चे को जन्म देने जैसी गंभीर परिस्थितियों में यदि आरोपी के प्रति नरमी बरती जाती है, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।
अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 363, 366, 376(2)(ढ), 376(3) तथा पॉक्सो अधिनियम, 2012 की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए अलग-अलग धाराओं में अधिकतम 20 वर्ष के कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
साथ ही अदालत ने पीड़िता को शासन की पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत ₹5 लाख की सहायता राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी की है।






