पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर हुई बहस का विजेता कौन , देखें विशेष रिपोर्ट

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच हुई बहस का कोई एकलौता “विजेता” या कोई एक नेता पूरी तरह सही नहीं था। इस तरह की राजनीतिक बहसों में दोनों पक्षों के पास अपने दावों को सही साबित करने के लिए अलग-अलग सरकारी दस्तावेज, तकनीकी तर्क और वित्तीय आंकड़े मौजूद थे।


  • विवाद के दो सबसे बड़े मुख्य बिंदुओं और दोनों पक्षों की तथ्यात्मक स्थिति नीचे दी गई है:

1. पोर्टल बंद होने का विवाद (कौन सही?)भूपेश बघेल का पक्ष (सही संदर्भ):

कांग्रेस सरकार का यह दावा तकनीकी रूप से सही है कि वर्ष 2022-23 के दौरान केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का पुराना रजिस्ट्रेशन पोर्टल बंद कर दिया था। केंद्र ने राज्य द्वारा अपने हिस्से का वित्तीय अंशदान  समय पर न देने के कारण छत्तीसगढ़ का टारगेट वापस ले लिया था और पोर्टल पर नए नाम जोड़ने पर रोक लगा दी थी।

  • विजय शर्मा का पक्ष (सही संदर्भ):

भाजपा सरकार का यह दावा प्रशासनिक रूप से सही है कि केंद्र ने यह कदम केवल छत्तीसगढ़ के लिए राजनीतिक द्वेष में नहीं उठाया था। नियमतः जब कोई राज्य सरकार अपना 40% वित्तीय हिस्सा नहीं देती, तो केंद्र का सॉफ्टवेयर  स्वतः ही आगे की किस्तें या लक्ष्य रोकना शुरू कर देता है।

2. मकानों की स्वीकृति और आंकड़ों का खेल कांग्रेस (भूपेश बघेल) का दावा:

  •  बघेल का कहना सही है कि उनके कार्यकाल में (विशेषकर चुनाव से ठीक पहले सितंबर 2023 में) करीब 7 लाख मकानों की स्थाई प्रतीक्षा सूची (PWL) को मंजूरी देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, उस दौरान बजट की कमी और चुनावी आचार संहिता के चलते धरातल पर सिर्फ लगभग 3 लाख मकान ही पूरे हो सके थे।
  • भाजपा (विजय शर्मा) का दावा: शर्मा का यह आंकड़ा बिल्कुल सही है कि भाजपा सरकार के आने के बाद कैबिनेट ने 18 लाख आवासों के निर्माण की प्रतिबद्धता जताई और वित्तीय वर्ष 2025-26 तक रिकॉर्ड गति से काम किया गया। भाजपा ने लगभग ₹16,000 करोड़ का भारी बजट जारी कर पेंडिंग मकानों को तेजी से पूरा करवाया है।

  • अंतिम निष्कर्ष

राजनीतिक विश्लेषकों और ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ही नेता अपने-अपने चुने हुए आंकड़ों को लेकर सही थे:

  • कांग्रेस का शासनकाल वित्तीय खींचतान, केंद्र-राज्य के बीच 60:40 के वित्तीय अनुपात के विवाद और राज्य के पास बजट की कमी से प्रभावित रहा। खुद भूपेश बघेल ने मंच पर स्वीकार किया कि आवास न बन पाने से जनता में नाराजगी थी और इसी वजह से कांग्रेस 2023 का चुनाव हारी।
  • भाजपा शासनकाल में वित्तीय इच्छाशक्ति मजबूत दिखी क्योंकि उन्होंने आते ही बड़ा बजट आवंटित किया। हालांकि, भाजपा द्वारा गिनाए जा रहे 18 लाख मकानों में से कई लाख मकान वही हैं जिनकी पात्रता कांग्रेस के समय तय हुई थी लेकिन वे पेंडिंग पड़े थे।
  • यह बहस किसी एक के सच या झूठ की नहीं, बल्कि एक ही योजना को दो अलग-अलग राजनीतिक नजरियों और अलग-अलग समय के आंकड़ों से देखने की थी।

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