`राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान)` से जुड़कर `ग्राम फुलवारी की सरस्वती स्व सहायता समूह` की महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। `बकरी पालन को स्थायी आय का जरिया` बनाते हुए महिलाओं ने `राखी निर्माण` से भी अतिरिक्त आमदनी कमाई।
राखी स्टॉल बना आकर्षण
`रक्षाबंधन` के मौके पर महिलाओं ने स्थानीय और प्राकृतिक सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कीं। `कलेक्टोरेट के सामने स्टॉल` लगाया, जहां `जनदर्शन में आए लोगों ने जमकर खरीदारी` की और हुनर की सराहना की।
`समूह की सदस्य सुनीता और अंजू धुरी` ने बताया कि राखी बिक्री से अतिरिक्त आय हुई और आत्मविश्वास भी बढ़ा। घर-परिवार संभालते हुए आर्थिक रूप से मजबूत होने का मौका मिल रहा है। 
बकरी पालन से मजबूत होगी आजीविका
महिलाओं को `बकरी पालन के लिए सहायता स्वीकृत` हुई है। इससे गांव में ही नियमित रोजगार मिलेगा और परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग कर पाएंगी।
`बिहान समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं को हुनर को बाजार मिल रहा है`। राखी जैसी मौसमी गतिविधि से स्थानीय मांग को कमाई में बदल रही हैं, वहीं बकरी पालन से दीर्घकालिक आजीविका तैयार हो रही है।














